अजन्मे बच्चों की ‘कब्रगाह’ बने इस शहर में हर रोज 38 अबॉर्शन!

0
92

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की भी एक स्याह सच्चाई है, जिसमें कई मासूमों की किलकारियां दफन हैं, जिसका शोर जिम्मेदारों के कानों तक नहीं पहुंच पा रहा है. राजधानी अब अजन्मे बच्चों की कब्रगाह बन चुकी है.

स्वास्थ्य संचालनालय की वर्ष 2016-17 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राजधानी में पिछले साल करीब 56 हजार गर्भवती महिलाओं ने पंजीयन कराया था. जिनमें से एक चौथाई यानी करीब 14 हजार महिलाओं अबॉर्शन कराने के लिए मजबूर होना पड़ा.

रिपोर्ट के अनुसार भोपाल के निजी अस्पतालों में 5018 और सरकारी अस्पतालों में 8941 अबॉर्शन कराए गए. औसतन हर रोज 38 अबॉर्शन हुए.

रिपोर्ट के आंकड़े इसलिए भी चौंकाने वाल है क्योंकि इंदौर में 80 हजार गर्भवती महिलाओं ने पंजीयन कराया था, लेकिन सबसे ज्यादा अबॉर्शन के केस भोपाल में सामने आए. हालांकि, बताया जा रहा है कि भोपाल में ज्यादातर अबॉर्शन मेडिकल टर्मीनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के नियमों के तहत ही किए गए हैं.

भोपाल पिछले तीन वर्षों से अबॉर्शन के मामले में टॉप पर है. राजधानी में 2016-17 में 13959, 2016-15 में 14755 और 2015-14 में 13658 अबॉर्शन हुए. राज्य में पिछले तीन साल में अबॉर्शन के मामले में भोपाल बाकी शहरों के मुकाबले काफी आगे है.

वर्ष 2016-17 में टॉप 5 शहर

1. भोपाल… 13959 अबॉर्शन
2. ग्वालियर… 6230 अबॉर्शन
3. धार… 5974 अबॉर्शन
4. सतना… 4483 अबॉर्शन
5. जबलपुर… 3566 अबॉर्शन

कानूनी रूप से देखा जाए तो:

-12 सप्ताह के गर्भपात के लिए एक डॉक्टर की अनुमति जरूरी होती है. अगर गर्भ 20 सप्ताह का है तो 2 डॉक्टरों की सहमति से गर्भपात कराया जा सकता है.
-रेप विक्टिम को गर्भपात कराने की अनुमति है.
-गर्भपात उसी समय करा सकते हैं जब या तो मां को कोई गंभीर बीमारी हो या फिर बच्चा विकलांग या अविकसित हो या फिर मां की जान को इससे खतरा हो.
-गर्भपात सरकारी और निजी संस्था से करवाया जा सकता है.

स्वास्थ्य विभाग में उप संचालक वीणा सिंहा का कहना है कि राजधानी में होने वाले हर अबॉर्शन का रिकॉर्ड मेंटनेन किया जाता है. इस वजह से यहां अबॉर्शन का आंकड़ा ज्यादा नजर आता है.

LEAVE A REPLY