इंजीनियरिंग में भी करनी पड़ सकती है इंटर्नशिप

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डॉक्टर बनने के लिए जिस तरह से इंटर्नशिप अनिवार्य है, उसी तरह अब इंजीनियरिंग के स्टूडेंट को भी अब इंटर्नशिप करनी पड़ सकती है। इसके लिए ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन(एआईसीटीई) ने एक प्रस्ताव पास कर दिया है और इसे केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेज दिया है।

इस प्रस्ताव के तहत देशभर में इंजीनियरिंग संस्थानों में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट के लिए इंटर्नशिप करना अनिवार्य होगा। जब तक वह स्टूडेंट इसे पूरा नहीं करेंगे, तब तक उन्हें डिग्री नहीं दी जाएगी। स्टूडेंट की इंटर्नशिप के लिए इंजीनियरिंग संस्थान कंपनियों से बात करेंगे। इसके लिए वे अलग-अलग कंपनियों को अपने कैंपस में आमंत्रित करेंगे और इंटर्नशिप दिलवाने में मदद करेंगे। जानकारों के अनुसार, इंटर्नशिप में स्टूडेंट जॉब मार्केट के लिए तैयार होंगे और इंडस्ट्री की जरूरतों को समझेंगे, जिससे उन्हें जॉब मिलने में आसानी होगी।

नौकरी के लायक नहीं 80 प्रतिशत इंजीनियर

हाल ही में एक सर्वे में खुलासा हुआ था कि देश के 80 प्रतिशत इंजीनियरिंग स्नातक रोजगार के काबिल नहीं है। उनमें कुशलता की काफी कमी है। देशभर में शैक्षणिक संस्थान लाखों युवाओं को प्रशिक्षित करते हैं, लेकिन इन संस्थानों से निकले स्टूडेंट रोजगार के लिए तैयार नहीं होते। सर्वे में शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम को उन्न्त बनाने की जरुरत पर जोर दिया गया है।

अलग से तैयार होंगे सिलेबस

स्टूडेंट को इंडस्ट्री के लिए तैयार करने के लिए कुछ कोर्स भी तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें सिलेबस का हिस्सा बनाया जाएगा। इनके अलग से क्रेडिट प्वाइंट दिए जाएंगे, जिससे हर स्टूडेंट इन्हें गंभीरता से ले। जानकारों के अनुसार, बहुत समय से यह चिंता का विषय बना हुआ है कि बहुत से इंजीनियरिंग स्टूडेंट नौकरी के लिए फिट नहीं होते। इसे देखते हुए ही यह कदम उठाया जा रहा है।

छात्रों को आसानी से मिलेगी नौकरी

इंजीनियरिंग के स्टूडेंट जब संस्थान से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें प्रैक्टिकल नॉलेज नहीं होती है, जिससे उन्हें अच्छी नौकरी मिलने में दिक्कत आती है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो इसका फायदा ऐसे स्टूडेंट्स को मिलेगा और जब वह इंजीनियरिंग पास कर बाहर निकलेंगे, तो बेहतर कंपनी में बेहतर पैकेज पर नौकरी पा सकेंगे। इसके लिए संस्थानों में च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम भी लागू करना होगा, ताकि स्टूडेंट्स को ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिकल नॉलेज मिल सके। – प्रो. राकेश सक्सेना, डायरेक्टर, एसजीएसआईटीएस

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