एक ऐसा जू जहां कैद में भी बढ़ा शेर,बाघों का कुनबा

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इंदौर। जंगलों के कुदरती माहौल में तो जानवरों की संख्या में हो रहे इजाफे के बारे में आपने बहुत सुना होगा, मगर चिड़ियाघर में इनकी संख्या तेजी से बढ़े तो अंचभा होता है। इंदौर का कमला नेहरू प्राणी संग्राहालय ऐसा ही एक जगह है, जहां कैद में भी पिछले कुछ सालों में शेरों, बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ा है।

5 साल में जानवरों की संख्या 275 से 600 हुई

यहां चलाए गए ब्रीडिंग प्रोग्राम का नतीजा ही है कि पांच साल में जानवरों और परिंदों की संख्या 275 से बढ़कर 600 तक पहुंच गई। जो देश के दूसरे चिड़ियाघरों के लिए भी एक मिसाल है। खासतौर पर शेरों और बाघों की संख्या में हुुए इजाफे ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा है।

कैद में बढ़ा शेरों,बाघों का कुनबा

सबसे चौंकाने वाले नतीजे तो शेरों और बाघों की ब्रीडिंग में मिले। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां दो साल पहले इंदौर जू में एक भी शेर नहीं था, वहीं आज इनकी संख्या 12 हो चुकी है।

इसकी शुरुआत बिलासपुर जू से मिले बब्बर शेर के जोड़े से हुई। जू प्रबंधन ने इनको कुदरती माहौल दिया, वहीं इनकी देखभाल के लिए तैनात कीपर्स से इनका ऐसा दोस्ताना रिश्ता बना कि इनके एक इशारे पर जानवर इधर से उधर हो जाते हैं।

इसी परवरिश के दम पर आज ज़ू में एशियाटिक लॉयन की संख्या 12 तक पहुंच गई। वहीं बाघों की ब्रीडिंग में भी ऐसे ही नतीजे मिले। बाघों की संख्या बढ़ने की वजह से नौबत ऐसी आई कि प्रबंधन को यहां से रॉयल बंगाल टाइगर का एक जोड़ा भोपाल भेजना पड़ गया।

विशेषज्ञों की मानें तो यहां रह रहे जानवरों और पक्षियों को चिड़ियाघर में प्राकृतिक वातावरण मिल रहा है,साथ ही खाने पर भी खास ध्यान रखा जाता है,इन्हीं सब वजहों से यहां ब्रीडिंग हो रही है।

परिंदों और रैपटाइल्स की संख्या भी बढ़ी

चिड़ियाघर में पक्षियों की ब्रीडिंग की बात करें तो यहां अबतक ईमू, ब्लॉसम हेडेड पैराकिट, सफेर मोर जैसे कई पक्षियों की ब्रीडिंग कराई गई है, जिससे इनकी संख्या में पहले मुकाबले इजाफा हो गया है, वहीं कुदरती माहौल देने की वजह से घड़ियाल,मगरमच्छ जैसे रैपटाइल्स का भी कुनबा बढ़ा है।

जंगल के कुदरती माहौल में तो जानवर अपना कुनबा बढ़ा लेते हैं, मगर पिंजरे में बंद होने के बाद भी अगर जानवरों की संख्या बढ़े तो ये वाकई खुशी की बात है, कम से कम देश का इंदौर जू तो ये करने में कामयाब रहा।

ऐसे में ये जू न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश के अन्य चिड़ियाघरों के लिए भी मिसाल है कि वो भी जंगल जैसा कुदरती माहौल देकर लुप्त हो रहे जानवरों की संख्या बढ़ा सकते हैं।

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