ऑफ द रिकार्ड: भागवत की आलोचना से घबराए मोदी ने दी GST में रियायतें

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नई दिल्ली। इस वास्तविकता को देखें। भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 22 सितम्बर को जीएसटी को लागू करने और अन्य मामलों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी। इससे बहुत से लोगों को हैरानगी हुई क्योंकि वह राज्यसभा में भाजपा के सांसद हैं और आरएसएस की शह पर प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत किए गए थे। इसके बाद आरएसएस के विचारक और स्तम्भकार एस. गुरुमूर्ति ने 25 सितम्बर को जीएसटी  को लागू करने पर सरकार की नीतियों और संबंध मामलों को लेकर तीखा प्रहार किया।

गुरुमूर्ति ने चेन्नई में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था निम्न स्तर पर पहुंच गई है और यह स्थिति किसी भी हालत में जारी नहीं रह सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके लिए नोटबंदी, एनपीए नियम, जी.एस.टी. और दिवालिया नियमों जैसे बहुत से कारण हैं। इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने 27 सितम्बर को अंग्रेजी के एक दैनिक समाचार पत्र में एक खुला लेख ‘अब मुझे बोलने की जरूरत है’ लिखा जिसमें सरकार की कड़ी आलोचना की गई। वित्त मंत्री अरुण जेतली ने सिन्हा पर पलटवार किया और उनके आरोपों को खारिज कर दिया। यहां तक कि सिन्हा के बेटे और केन्द्रीय राज्य मंत्री ने भी अपने पिता के खिलाफ लेख लिखा।
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मामला यहीं खत्म हो जाता मगर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 30 सितम्बर को दशहरे के दिन एक तीखा भाषण दिया। भागवत के एक घंटे के भाषण से भाजपा नेतृत्व में हलचल मच गई क्योंकि उन्होंने आर्थिक मोर्चे पर खासकर जीएसटी को लेकर ‘लैफ्ट, राइट’ और सैंटर को आड़े हाथ लिया। क्या इन 4 प्रमुख नेताओं के सरकार के खिलाफ बोलने के बीच कोई संबंध हो सकता है लेकिन भागवत ने जो कहा उससे प्रधानमंत्री मोदी परेशान हुए और अगले ही दिन कदम पीछे हटाते हुए कहा कि जीएसटी नियमों में बदलाव किया जाएगा।

भागवत ने उस समय सार्वजनिक रूप से भाषण दिया क्योंकि दिल्ली और नागपुर में आरएसएस मुख्यालयों में उनके पास हर रोज कोई न कोई प्रतिनिधिमंडल मिलता जो कहता था कि ये वे भाजपा और पूर्व जनसंघ नहीं हैं जिन्हें उन्होंने पिछले कई वर्षों से वोट दिए। व्यापारिक समुदाय ने सरकार के खिलाफ कमर कस ली थी क्योंकि न तो जेतली और न ही मोदी उनकी बात सुनते थे। अंतत: भागवत ने लाल झंडा उठाया और जेतली को मुंह की खानी पड़ी तथा बाद में मोदी ने कम्पनियों के सचिवों को बताया कि जीएसटी में कुछ रियायतें दी जा रही हैं। अब यह स्पष्ट है कि 80 प्रतिशत छोटे व्यापारी और बिजनैसमैनों को कुछ राहत उपलब्ध करवाई गई है। नॉर्थ ब्लाक में जेतली के नेतृत्व में जो प्रशासन है उसे मुंह की खानी पड़ी।

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