ओंकारेश्वर बांध से पानी कम नहीं हुआ तो आंदोलन करेंगे डूब प्रभावित

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खंडवा। ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर 193 मीटर पर पहुंच गया है। हमारे खेत डूब गए हैं, मकानों में पानी घूस रहा है, हम कहां जाएं। हमने पैसा भी वापस दे दिया, पैसा गया जमीन गई अब बच्चों को क्या खिलाएं। 193 मीटर पानी वापस लो नहीं तो हमें बम से उड़ा दो… ।

यह बात सोमवार दोपहर को कलेक्टोरेट परिसर में ओंकारेश्वर बांध के डूब प्रभावितों ने कही। यहां घोघलगांव, एखंड, कामनखेड़ा और टोकी के डूब प्रभावितों ने प्रशासन को अपनी समस्या बताईं। विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस और आप के पदाधिकारी भी नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं के साथ खड़े नजर आए। सभी ने एक स्वर में प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। डूब प्रभावितों ने चेतावनी दी है कि यदि बांध का जलस्तर कम नहीं हुआ तो हम आंदोलन करेंगे।

ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर बढ़ने से दहशत में आए ग्रामीण बुधवार दोपहर 1 बजे खंडवा कलेक्टोरेट पहुंचे। यहां प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। डूब प्रभावित बाबूलाल खंडेलवाल ने कहा कि हमारे खेत मकान डूब रहे हैं लेकिन हमारी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। हम कहां जाएं। रामगिर केशरगिर ने कहा कि मेरा मकान टापू बन गया है, परिवार में 10 सदस्य हैं। चार साल पहले 1 लाख 26 हजार रुपए मुआवजा जब्त करा चुका हूं। इसके बावजूद अब तक न जमीन मिली है न मुआवजा।

घोघलगांव के दुलीचंद रामचंद ने कहा कि मैंने छह एकड़ जमीन में कपास बोया था, पूरा खेत जलमग्न हो गया है। करीब 1 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। दोपहर 2.45 बजे ग्रामीणों ने डिप्टी कलेक्टर उषा सिंह को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या बताई।

दोपहर करीब 3.30 बजे कलेक्टर अभिषेक सिंह से डूब प्रभावितों ने चर्चा की लेकिन कलेक्टोरेट से बाहर आए ग्रामीणों ने कहा कि चर्चा बेनतीजा रही। कलेक्टर ने बांध का जलस्तर कम करने से मना कर दिया है। नागचून के पास मांगी गई जमीन के लिए भी हमें मना कर दिया गया है। अन्य स्थानों पर जमीन देने की बात पर कलेक्टर ने तीन दिन बाद जवाब देने को कहा है।

गांव में जनजीवन हुआ प्रभावित

– ग्राम गोल में स्कूल जाने के करीब पांच किलोमीटर रास्ते पर पानी भरा गया है। यहां पानी के बीच से होकर छात्राएं स्कूल जाने को मजबूर हैं।

– घोघलगांव में करीब 200 किसानों की 700 एकड़ जमीन में फसल को नुकसान हुआ है, खेत जलमग्न हैं, मकानों तक पानी पहुंच गया है।

– डूब प्रभावित गांव एखंड में घरों तक पानी पहुंच रहा है, कामनखेड़ा से घोघलगांव तक आने वाले रास्ते पर भी पानी भरा रहा है।

– घोघलगांव में प्रायमरी और मिडिल स्कूल का भवन टापू की तरह नजर आ रहा है, यहां तीनों ओर से पानी भरा गया है।

कांग्रेस-आप ने जताया विरोध

कलेक्टोरेट में विस्थापितों और नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दोनों पार्टियां प्रदेश सरकार के खिलाफ एक जाजम पर खड़ी नजर आईं। यहां युवक कांग्रेस के मांधाता विधानसभा अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने कहा कि सरकार विस्थापितों को उनका हक नहीं दे रही है। जो लोग मुआवजे की राशि जमा करा चुके हैं, उन्हें जमीन मिलना चाहिए। इसी तरह आम आदमी पार्टी की खंडवा विधानसभा संगठन प्रभारी मल्लिका देवनाथ ने कहा कि बांध में पानी बढ़ने के कारण लोगों के घर टापू बन रहे हैं, वहीं ओंकारेश्वर और खेड़ीघाट में नर्मदा का जलस्तर समान नहीं होने के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं।

न्यायालय की अवमानना

नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता अजय गोस्वामी ने कहा कि न्यायालय का आदेश है कि ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर 189 मीटर रखा जाए। कुछ दिन पूर्व बांध के गेट खोलने के पत्र में कलेक्टर ने इस आदेश का उल्लेख भी किया है लेकिन अब बांध को 193 मीटर तक भरा जा रहा है। यह न्यायालय के आदेश की अवमानना है। अब ग्रामीण आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

नर्मदा घाटी को बर्बाद कर रहे हैं शिवराज

ओंकारेश्वर बांध में पानी भर बिना पुनर्वास के लोगों को उजाड़ा जा रहा है। नदी संरक्षण का ढोंग करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह नर्मदा घाटी को बर्बाद कर रहे हैं। डूब प्रभावितों के घर और खेतों में पानी भरा रहा है। इसके बावजूद बांध का जलस्तर बढ़ाया जा रहा है। मुआवजा वापस करने के चार साल बाद भी प्रभावितों को जमीन नहीं मिली है। इसके खिलाफ हम आंदोलन करेंगे।

– आलोक अग्रवाल, वरिष्ठ कार्यकर्ता, नर्मदा बचाओ आंदोलन

निराकरण का करेंगे प्रयास

बांध का लेवल 193 मीटर रखा जा रहा है। डूब प्रभावितों ने समस्याएं बताईं हैं, अलग-अलग गांवों की स्थिति के अनुसार जो भी निराकरण हो सकेगा, उसका प्रयास करेंगे। जिन लोगों ने जमीन नहीं मिलने जैसी समस्याएं बताईं हैं, उनके लिए भी जो बेहतर विकल्प हो सकेगा, वह करेंगे।

– अभिषेक सिंह, कलेक्टर, खंडवा

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