कभी मां बेचा करती थी सब्जी, आज बेटी बनी इंटरनेशनल बॉक्सर

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किसी ने सच ही कहा है दिल में तमन्ना हो तो व्यक्ति कुछ भी कर सकता है। बाजी वहीं मारता है, जो मुश्किल की घड़ी में अपने आपको निकाल कर तरक्की की राह पर आगे बढ़ने की कोशिश करता है। यह बात काफी हद तक सच होती भी दिखाई देती है क्योंकि असम के छोटे से गांव में रहने वाली एक लड़की ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया।

असम के शोनितपुर जिले के छोटे से गांव बेलसिरि गांव की रहने वाली जमुना बोडो आज इंडियन लेडी बॉक्सिंग के लिए मशहूर हो गई है। इन्होंने अपनी लाइफ में बहुत सी मुश्किलों का सामना किया लेकिन उनकी मां और जमुना ने कभी हिम्मत नहीं हारी। 10 साल की उम्र में जमुना ने अपने पिता हमेशा के लिए खो दिया और उसके बाद उनकी मां ने काफी बुरे हालातों से गुजरते हुए जमुना की परवरिश कीं।

बेटी को आगे बढ़ाने के लिए मां ने अपने गांव में सड़क के किनारे बैठ सब्जी बेची।  जमुना के घर में एक मां के अलावा एक बहन और एक भाई है। जमुना ने गांव में वूशू से खेलने की शुरुआत की और बाद में उसने बॉक्सिंग ट्रैनिंग लेनी शुरू कर दीं।

आपको बता दे कि जमुना वूशू के डिस्ट्रिक्ट लेवल पर गोल्ड जीत चुकी है। इसके अलावा 2013 में उसने दूसरी नेशनल कप इंटरनेशनल सब जूनियर गर्ल्स बॉक्सिंग टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीता और 2014 में रूस में हुए कॉम्पीटीशन में भी उसने गोल्ड मेडल हासिल किया। इसी के साथ 2015 में वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में ब्रोन्ज मेडल जीता।

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