कर्णन कोलकाता जेल में, न्यायालय से नहीं मिली राहत

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कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सीएस कर्णन को बुधवार को कोलकाता की एक जेल में कैद कर दिया गया। छह सप्ताह तक फरार रहने के बाद कर्णन को आखिरी समय में उच्चतम न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली। लेकिन इसके बाद उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की और उन्हें जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।

62 वर्षीय कर्णन को कल शाम में तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया था। वह किसी उच्च न्यायालय के पहले ऐसे न्यायाधीश हैं जिन्हें जेल की सजा सुनायी गई। वह नौ मई से ही गिरफ्तारी से बच रहे थे। उच्चतम न्यायालय की सात न्यायाधीशों की एक पीठ ने अदालत की अवमानना के लिए कर्णन को छह महीने कैद की सजा सुनाई थी।

कर्णन 12 जून को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हो गए थे। उन्हें पश्चिम बंगाल सीआईडी ने कोयंबटूर से करीब छह किलोमीटर दूर मालुमिचमपट्टी स्थित एक निजी रिजॉर्ट से गिरफ्तार किया। वह वहां पिछले कुछ दिनों से छुपे हुए थे। गिरफ्तार कर्णन को चेन्नई से यहां लाया गया और कोलकाता हवाई अड्डे से सीधे प्रेजीडेंसी जेल भेज दिया गया।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सीआईडी के अधिकारियों की एक टीम उन्हें एअर इंडिया की उड़ान से यहां लेकर आई। पूरे बाजू की सफेद कमीज और पैंट पहने कर्णन हवाई अड्डे से बाहर आए और उनके साथ सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी थे। जब संवाददाताओं ने उनके पास पहुंचने का प्रयास किया तो पुलिस वाले उन्हें तेजी से वहां से निकालकर ले गए।

अधिकारी ने कहा कि उनका चिकित्सकीय परीक्षण हवाई अड्डे पर ही पूरा किया गया और उन्हें सीधे जेल ले जाया गया। हवाई अड्डे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए थे जहां कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे।

प्रेजीडेंसी जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कर्णन को जैसे ही जेल के भीतर ले जाया गया उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की और जेल अस्पताल से चिकित्सकों की एक टीम उनकी जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि वह वृद्ध हैं और अस्वस्थ भी लग रहे हैं। हम कोई भी खतरा नहीं लेना चाहते। उनकी एक ईसीजी की गई। अधिकारी ने कहा कि यदि उनकी मेडिकल रिपोर्ट में कुछ गलत पाया जाता है तो हो सकता है कि कर्णन को किसी राजकीय अस्पताल ले जाया जाए।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोलकाता से तीन पुलिस टीम कोयंबटूर में डेरा डाले हुए थीं और मोबाइल फोन कॉल के आधार पर उन्होंने कर्णन का पता लगा लिया। तमिलनाडु पुलिस उनका पता लगाने में मदद के लिए तकनीकी सहायता मुहैया करा रही थी। कर्णन को आखिर समय में कोई राहत नहीं मिली। उच्चतम न्यायालय ने उनकी अंतरिम जमानत एवं छह महीने की सजा निलंबित करने की मांग वाली अर्जी पर विचार करने से इनकार कर दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले में सात न्यायाधीशों के आदेश से बंधी हुई है और इसके इतर नहीं जा सकती। न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अवकाशकालीन पीठ ने इस मामले की सुनवाई सात न्यायाधीशों की पीठ ने की थी और आदेश पारित किया था। यह आदेश हमारे लिए बाध्यकारी है। हम अवकाश के दौरान इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते। इस मामले में हम कुछ नहीं कर सकते।

सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर्णन, जिन्हें कल कोयम्बटूर से गिरफ्तार किया गया, की ओर से वकील मैथ्यूज जे नेदुम्बरा ने कहा कि समता की मांग है कि न्यायालय खुलने तक उन्हें जमानत दी जाए। यद्यपि पीठ ने कहा कि सारी समता कानून और न्यायिक अनुशासन के दायरे में आती है। आप प्रधान न्यायाधीश के समक्ष इस मामले का उल्लेख कीजिए।

नेदुम्बरा ने दलील दी कि पीठ को जमानत देने और छह महीने की सजा को निलंबित करने के सारे अधिकार प्राप्त हैं क्योंकि सात न्यायाधीशों की पीठ को इस मामले में अभी विस्तत फैसला सुनाना है। इस दलील से पीठ प्रभावित नहीं हुई और उसने इस पर विचार से इंकार कर दिया।

कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 12 जून को सेवानिवत्त हुये हैं। शीर्ष अदालत के नौ मई के आदेश के बाद से ही गिरफ्तारी से बचने का प्रयास करते रहे कर्णन को पश्चिम बंगाल की सीआईडी ने गिरफ्तार किया। कर्णन किसी उच्च न्यायालय के पहले ऐसे पीठासीन न्यायाधीश हैं जिन्हें शीर्ष अदालत ने जेल की सजा सुनाई। वह ऐसे पहले न्यायाधीश हैं जो एक फरार व्यक्ति के रूप में सेवानिवृत्त हुए और उनके सम्मान में कलकत्ता उच्च न्यायालय पारंपरिक विदाई समारोह भी आयोजित नहीं कर सका।

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