क्षेत्रीय मातृभाषा बचाने अभियान चलाएगा संघ

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भोपाल। अंग्रेजी भाषा के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूरे देश में मातृभाषा बचाओ अभियान चलाएगा। संघ का मानना है कि अंग्रेजी माध्यम के प्ले स्कूल, नर्सरी और प्री-प्राइमरी स्कूल के बढ़ते प्रभाव के कारण बच्चे अपनी मातृभाषा से दूर होते जा रहे हैं।

मातृभाषा से जोड़े रखने के लिए जरूरी है कि प्राइमरी तक शिक्षा बच्चों को उन्हीं की क्षेत्रीय मातृभाषा में दी जाए। यानी मराठी, तमिल, कन्न्ड़, बांग्ला, उड़िया, गुजराती, मलयाली, नेपाली, पंजाबी, सिंधी या कोई भी अन्य क्षेत्रीय भाषा जानने वाले बच्चों को उन्हीं की भाषा में पढ़ाया जाए।

इसके लिए देशभर के गैर हिंदीभाषी प्रचारक संघ की बैठक में हिस्सा लेने के लिए भोपाल आ रहे हैं। वे यहां अपने-अपने राज्य के रहवासियों के साथ उन्हीं की भाषा में बैठक करेंगे और उन्हें मातृभाषा बचाने सहित संघ के लक्ष्य से अवगत कराएंगे। इसका मकसद क्षेत्रीय भाषाओं को बचाए रखना है। संघ सूत्रों का कहना है कि जब बच्चे की उम्र मातृभाषा सीखने की होती है, तब उसे अंगेजी के प्ले स्कूल में डाल दिया जाता है। इस वजह से उन्हें अपनी मातृभाषा का भी ज्ञान नहीं हो पाता। परिवार के बोलचाल में भी नई पीढ़ी के बच्चे अंग्रेजी भाषा का ही इस्तेमाल करते हैं।

प्रचारक जाएंगे बारह समाज की बैठक में: संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में शामिल होने के लिए देशभर के प्रचारक भोपाल आ रहे हैं। इनमें से कई गैर हिंदीभाषी राज्यों के हैं। ये प्रचारक यहां अपनेअपने समाज या राज्य के रहवासियों के साथ उन्हीं की मातृभाषा में बैठक करेंगे। इस तरह 12 समाज की बैठक भोपाल में अलग-अलग स्थानों पर बुलाई गई है। इनमें खासतौर से दक्षिणभाषी राज्यों के तमिल, तेलुगू, मलयाली, कन्न्ड़ के साथ गुजराती, उड़िया, बंगाली, नेपाली, पंजाबी और सिंधी समाज की बैठक होंगी। ये समाज भोपाल में बहुत संख्या में है। बैठक में क्षेत्रीय मातृभाषा को बचाने के साथ संघ का परिचय भी लोगों को दिया जाएगा। संघ से जुड़े वरिष्ठ प्रचारक का मानना है कि देश की जो नई शिक्षा नीति बन रही है, उसमें प्राथमिक तक की शिक्षा क्षेत्रीय मातृभाषा में दिए जाने का विकल्प जोड़ा जाना चाहिए। उसमें अंग्रेजी भी पढ़ाएं, हमें ऐतराज नहीं पर मूल शिक्षा उसकी मातृभाषा में हो।

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