घाटी के हालात पर खतरे में BJP-PDP गठबंधन

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जम्मू-कश्मीर में दो साल पहले गठबंधन सरकार बनानी वाली बीजेपी और पीडीपी राज्य में भीड़ की हिंसा, बढ़ते आतंकवाद और हाल में हुए श्रीनगर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कम वोटिंग को लेकर इन दिनों सार्वजनिक व निजी दोनों ही रूप से एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे रही हैं। घाटी में पत्थरबाजों और हिंसक भीड़ से निपटने का तरीका दोनों ही ओर से हो रही बयानबाजी का केंद्र है। पीडीपी की कहती है कि घाटी के हालात पर बीजेपी की राजनीति ‘टकराव को बढ़ाने वाली’ है, जबकि बीजेपी का कहना है कि पीडीपी ‘तुष्टीकरण’ की राजनीति कर रही है। बीजेपी मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से लगातार कहती रही है कि वह पत्थरबाजों के खिलाफ सख्य कार्रवाई करें और नैशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीति के दबाव में ना आएं।वहीं कश्मीर को लेकर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस उलझन की वजह से सुरक्षा तंत्र तबाह हो रहा है। एक सीनियर अधिकारी ने नाम ना जाहिर करने की शर्त पर बताया, ‘जब हम पत्थरबाजों को गिरफ्तार करते हैं तो हमें उन्हें छोड़ने के लिए राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उनमें से कई पीडीपी और नैशनल कॉन्फ्रेंस से होते हैं। दोनों ही पार्टियां कानून-व्यवस्था को कमजोर करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करती हैं।’बीजेपी के साथ सरकार बनाने वाले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और महबूबा के पिता दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद ने इस गठबंधन को ‘कश्मीर की जनता और शेष भारत’ के बीच हुआ गठबंधन बताया था। उन्होंने उम्मीद की थी इस गठबंधन की वजह से नरेंद्र मोदी को दिल्ली की सत्ता में लाने वाले लोग कश्मीर के और नजदीक आएंगे। पीडीपी के एक नेता ने बताया, ‘यह दो विरोधी पार्टियों के बीच हुई एक असंगत साझेदारी थी। बीजेपी आरएसएस की राजनीतिक शाखा है जिसका मकसद धर्मनिरपेक्ष भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाना है।’ पीडीपी कश्मीर के मौजूदा हालात के लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताती है। उसका कहना है कि बीजेपी के अलगाववादियों और पाकिस्तान से राजनीतिक बातचीत खत्म करने के फैसले और घाटी के लोगों को विश्वास में नहीं लेने की वजह से हालात बिगड़ गए।दोनों पार्टियों के बीच दरार बढ़ती देख शुक्रवार को राज्य के वित्त मंत्री हसीब द्रबू ने माधव से जम्मू स्थित बीजेपी दफ्तर में मुलाकात की। सूत्रों ने बताया कि दोनों के बीच गठबंधन को लेकर बढ़ रहे संकट और दूरी को लेकर बातचीत हुई। उधर नैशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस दोनों ही राज्य में गवर्नर रूल लगाए जाने की बात कह रही हैं। राज्य में कांग्रेस के अध्यक्ष जीए मीर ने कहा, ‘राज्य में पूरी तरह अराजतकता फैली हुई है। पीडीपी-बीजेपी ने राज्य को 1990 के दशक के दौर में पहुंचा दिया है जब कश्मीर ने आतंकवाद का सबसे बुरा दौर देखा था।

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