घास से बने ईंधन से उड़ते दिखेंगे विमान

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लंदन। जैव ईंधन के विकास में जुटे वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है। वैज्ञानिकों ने घास से बने जैव ईंधन का विकास किया है। इसका नाम “ग्रासोलिन” रखा गया है। उनका दावा है कि भविष्य में घास से पैदा ईंधन से विमान उड़ते दिख सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने उन विधियों को परखा जिसमें घास से ईंधन बनाया जा सकता है। बेल्जियम की गेंट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता वे कर्न खोर ने कहा कि अभी घास का मुख्य रूप से इस्तेमाल पशुओं के चारे के तौर पर किया जाता है। इसका उपयोग जैव ईंधन के तौर पर भी किया जा सकता है। घास ऊर्जा का बड़ा स्त्रोत भी बन सकती है।

प्रक्रिया काफी महंगी

वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल घास से बेहद कम मात्रा में ही जैव ईंधन बनाया जा सकता है। घास को ईंधन के रूप में तब्दील करने की मौजूदा प्रक्रिया भी महंगी है। अगर इस दिशा में और शोध किया जाए तो लागत को कम किया जा सकता है।

ऐसे बनेगा ईंधन

शोधकर्ताओं के अनुसार, पहले घास की जैव क्षमता को बेहतर कर इसमें बैक्टीरिया को मिलाया जाता है। इससे घास में मौजूद शुगर लैक्टिक एसिड में बदल जाता है। लैक्टिक एसिड दूसरे कंपाउंड जैसे बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक (पीएलए) या ईंधन बनाने वाले रसायन के तौर पर काम कर सकता है। इसके बाद लैक्टिक एसिड पहले कैप्रोइक एसिड और फिर डीकेन में बदल जाता है। यह डीकेन विमानन ऊर्जा के तौर पर उपयोग किया जा सकता है।

 

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