जयारोग्य अस्पताल के न्यूरोलॉजी वार्ड पकड़ाया फर्जी डॉक्टर

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ग्वालियर। जयारोग्य अस्पताल के न्यूरोलॉजी वार्ड में 12 मार्च को एक फर्जी डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहा था। संदेह होने पर जब सिक्योरिटी गार्ड ने पूछताछ की तो पता चला कि वह डॉक्टर है ही नहीं। इसके बाद युवक का ड्राइविंग लायसेंस, आधार कार्ड एवं मोबाइल जब्त करके छोड़ दिया गया। सोमवार रात को युवक के दस्तावेज और मोबाइल तो गार्ड ने लौटा दिए, लेकिन उससे लिखित में माफीनामा ले लिया गया है। घटना के दो दिन बाद भी अस्पताल प्रबंधन को मामले की जानकारी ही नहीं है।

12 मार्च की रात 12.30 बजे जयारोग्य अस्पताल के न्यूरोलॉजी वार्ड में जब एक मरीज आया तो उसके साथ ही तेज गति से अजय मौर्य नाम का युवक अंदर दाखिल हो गया। सिक्योरिटी गार्ड ने उसे अटेण्डेंट समझकर जाने दिया। लेकिन जब गार्ड ने युवक को अंदर मरीज की नब्ज पकड़ते एवं सिर टटोलते देखा तो मामला गड़बड़ दिखाई दिया। जब वह 12 नंबर बेड पर भर्ती मरीज की नब्ज पकडने लगा तो सिक्योरिटी गार्ड ने युवक की कॉलर थाम ली। पहले तो युवक ने खुद को पत्रकार बताते हुए रौब गांठने का प्रयास किया, लेकिन जब गार्ड ने दो चांटे रसीद किए तो फर्जी डॉक्टरी की पूरी कहानी सामने आ गई।

इसके बाद गार्ड ने उसका मोबाइल, आधार कार्ड एवं ड्रायविंग लायसेंस जब्त कर लिया। जेएएच प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों के जब फोन नहीं उठे तो लड़के को छोड़ दिया गया। इसके बाद सोमवार की रात को अजय मौर्य ने जेएएच पहुंचकर गार्ड से अपने सामान की मांग की थी। उसका तमाम सामान तो लौटा दिया गया है लेकिन उससे लिखित में माफीनामा लिखवाया गया है।

भाई ठीक हुआ था, सेवा करने आता हूं

सिक्योरिटी गार्ड जब युवक को बाहर लाया तो वहां पर जेल बंदी के साथ आए पुलिस के जवान भी मौजूद थे। इसके बाद जब उससे पूछताछ हुई तो उसने अपना नाम अजय मौर्य बताते हुए नई सड़क पर स्थित किसी समाचार पत्रिका के कार्यालय का आईसी भी दिखाया। साथ ही बताया कि उसके भाई का 6 माह पहले न्यूरोलॉजी विभाग में उपचार हुआ था और वह पूरी तरह से ठीक हो गया था। इसलिए वह यहां पर मरीजों की सेवा करने के लिए आता है।

वर्दी नहीं देख सका…पकड़ा गया

न्यूरोलॉजी वार्ड में तैनात गार्ड ने वर्दी पर काला कोट पहन रखा था। इसकी वजह से वह जब युवक के पीछे जाकर खड़ा हुआ तो वह पहचान नहीं सका। इसी कारण तुरंत पकड़ा गया। युवक शराब भी पिए हुए थे।

नहीं उठे अधिकारियों के फोन

घटना के बाद सिक्योरिटी गार्ड ने तुरंत सुपरवाइजर को सूचना दी। इसके बाद जेएएच के वरिष्ठ अधिकारियों को भी फोन लगाए गए, लेकिन किसी का फोन नहीं उठा। मामले की जानकारी लगने पर जूडा अध्यक्ष डॉ. श्याम राजपूत मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी युवक से पूछताछ की, लेकिन वह कोई सही जवाब नहीं दे सका।

सिक्योरिटी गार्ड को देंगे नोटिस

जेएएच प्रबंधन को घटना के दो दिन बाद भी मामले की जानकारी ही नहीं है। जेएएच के सहायक अधीक्षक डॉ. जीतेन्द्र नरवरिया अब उस सिक्योरिटी गार्ड को ही नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं, जिसने फर्जी डॉक्टर को इलाज करते पकड़ा है। उसको नोटिस देकर पूछा जाएगा कि इतनी बड़ी घटना हुई थी तो तुरंत सूचना क्यों नहीं दी गई।

हमें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा कुछ हुआ था तो गार्ड को हमें सूचना देना चाहिए। डॉ. जेएस सिकरवार, अधीक्षक जयारोग्य अस्पताल

 

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