डीजल चोरी के लिए कर्मचारी कर रहे हेराफेरी, मैजिक वाहन के जीपीएस को डंपर में लगाया

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भोपाल। डीजल घोटाले के बाद नगर निगम की गाड़ियों की मानिटरिंग करने के लिए जीपीएस लगाए गए हैं, लेकिन इसमें छेड़छाड़ का एक मामला सामने आया है। मामले में जीपीएस को मैजिक वाहन से निकालकर डंपर में लगा दिया गया। गड़बड़ी पकड़ में आने पर दो ड्राइवरों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।

मामला जोन नंबर 11 का है। मैजिक वाहन में जीपीएस लगाया था, इसका एरिया तय है कि वार्ड के अंदर के कचरे का कलेक्शन करके शाहजहांनी पार्क स्थित ट्रांसफर स्टेशन में फेंके। लेकिन, जीपीएस से मानिटरिंग में मैजिक की लोकेशन अयोध्या बायपास भानपुर खंती की तरफ दिखाई दी।

गड़बड़ी की सूचना मिलते ही जीपीएस प्रभारी ओपी भारद्वाज व जीपीएस के समीक्षा प्रभारी प्रेमशंकर शुक्ला ने जीपीएस की टीम और जोन के एएचओ राजेश घेंघट को मौके पर भेजा। एक टीम वार्ड में बरखेड़ी फाटक के पास भेजी और दूसरी को अयोध्या बायपास। इधर, भनक लगते ही ड्राइवर ने मैजिक को बरखेड़ी फाटक से गलियों में ले गया। वहां जीपीएस टूटा हुआ मिला। दूसरी ओर अयोध्या बायपास पर डंपर खड़ा मिला, जिसमें जीपीएस निकला हुआ था। ड्राइवरों का प्रयास था कि टीम आने से पहले जीपीएस डंपर से निकालकर मैजिक में लगा दे। ताकि गड़बड़ी पता न चले। लेकिन, जीपीएस से छेड़छाड़ की पुष्टि होने और लोकेशन के आधार पर चोरी पकड़ी गई। दोनों ड्राइवरों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया।

400 गाड़ियों की हो रही मानिटरिंग

बता दें कि नगर निगम में डीजल चोरी रोकने और इनकी लोकेशन पर नजर रखने के लिए स्वास्थ्य शाखा की 400 गाड़ियों में जीपीएस लगाए जा चुके हैं, इनकी दो महीने की रिपोर्ट भी आ चुकी है। अब ज्यादा डीजल खपत करने वाले जिम्मेदार सहायक यंत्रियों, एएचओ को नोटिस जारी हो सकते हैं।

कई जगह हुआ सुधार

जोन तीन में मैजिक वाहन कम किमी चलने के बाद भी डीजल ज्यादा ले रहे थे, जब एएचओ को इस बारे में चेतावनी दी गई तो सिस्टम में सुधार हुआ। पहले एक मैजिक को रोजाना सात से आठ लीटर डीजल जारी होता था अब किमी के हिसाब से रोजाना तीन से चार लीटर जारी हो रहा है। अन्य जोन में भी सुधार हुआ है। मैजिक आमतौर पर रोज 15 से 20 किमी चलती हैं, लेकिन इन्हें 40 से 50 किमी की दूरी दिखाकर डीजल लिया जाता था।

सिस्टम को फ्लॉप करने के प्रयास

निगम सूत्रों के अनुसार जीपीएस लगने के बावजूद भी अभी 30 फीसदी डीजल चोरी हो रहा है। जो लोग चोरी नहीं कर पा रहे हैं वे सिस्टम को फ्लॉप करना चाहते हैं। वार्ड में जानबूझकर कचरे की समस्या दिखाकर इसके लिए जीपीएस सिस्टम को जिम्मेदार ठहराने के प्रयास हो रहे हैं।

इनका कहना है

दोनों गाड़ियों में वापस जीपीएस लगाया दिया है। जीपीएस से जो ड्राइवर छेड़छाड़ करेगा उसे कार्य मुक्त करने के लिए आयुक्त से अनुशंसा की जाएगी। साथ ही आर्थिक हानि पहुंचाने के कारण उन पर एफआईआर पर भी विचार होगा – ओपी भारद्वाज, प्रभारी जीपीएस व नगर यंत्री

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