दुष्कर्म पीड़िता को 13 सप्ताह का गर्भ, कोर्ट ने दी अबॉर्शन की अनुमति

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मध्य प्रदेश के हरदा में जिला अदालत ने 15 वर्षीय बलात्कार पीड़िता को उचित चिकित्सकीय देखरेख में गर्भपात की अनुमति दे दी है. पीड़िता को 13 सप्ताह का गर्भ है. अदालत ने आदेश देने के पहले पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया था, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने गर्भपात नहीं कराने पर पीड़िता की जान को खतरा बताने का अभिमत दिया था.

दरअसल, बलात्कार पीड़िता के माता-पिता ने बेटी को हो रही शारीरिक और मानसिक पीड़ा के आधार गर्भपात की अनुमति मांगी थी. परिजनों को बेटी के साथ कथित दुष्कर्म के बारे में उस वक्त पता चला, जब पेट दर्द होने पर वह उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे. यहां मेडिकल जांच में उसके प्रेग्नेंट होने का खुलासा हुआ था.

जिले में अपने तरह के इस पहले मामले में न्यायाधीश ने मेडिकल टीम का अभिमत जाना था. पांच सदस्यीय मेडिकल टीम के डॉक्टरों ने अदालत को बताया कि गर्भधारण से बालिका के आगामी जीवन पर खतरा हो सकता सकता है, जिसके बाद अदालत ने परिजनों को गर्भपात कराने की अनुमति प्रदान की.

शासकीय अधिवक्ता आलोक गोयल ने बताया की मेडिकल टर्मिनेशन एक्ट के तहत यह अनुमति प्रदान की है. अदालत ने अपने आदेश में गर्भपात के पहले सारी मेडिकल जांच कराने के आदेश दिए है. इसके बाद मेडिकल बोर्ड की निगरानी में दो डॉक्टरों की टीम गर्भपात करे.

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