नेशनल हाईवे पर सील हो रहे हैं बड़े होटलों के बार

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान सरकार ने नेशनल हाईवे पर बने होटलों के बार को सीज करना शुरू कर दिया है. राजस्थान के आबकारी विभाग ने आदेश निकाला है कि नेशनल हाईवे के 500 मीटर के अंदर के सभी शराब दुकानों और होटलों के बार को बंद कर दिया जाए, और उनके लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा.

दरअसल राजस्थान सरकार ने स्टेट हाईवे का नाम बदलकर अरबन रोड करके दुकानों और होटलों के बार को बचा लिया मगर नेशनल हाईवे का नाम बदलने के लिए केंद्र से परमिशन की जरुरत होती है, लिहाजा यहां पर बार को सीज किया जा रहा है.

जयपुर से होकर तीन नेशनल हाईवे गुजरते हैं. नेशनल हाईवे-8, नेशनल हाईवे-11 और नेशनल हाईवे-13 इन तीनों हाईवे पर शहरी इलाका है जहां कई बड़े और फाईव स्टार होटल बने हैं.

वहीं सरकार ने पहले ही हाईवे को नोटिफाई कर अरबन रोड बना दिया था, मगर जो इलाका जयपुर नगर निगम के दायरे में नहीं आता है वहां पर बने बड़े होटलों और रिजार्ट के बार को सीज किया जा रहा है.

राजस्थान सरकार का आदेश मिलते ही आबकारी अधिकारी टोक रोड पर बने अम्बेर विला पैलेस पहुंचे, जहां शराब के स्टाक को हटाकर बार को सीज कर दिया गया. इसी सड़क पर जयपुर का मशहूर रिसॉर्ट चोखी ढाणी भी है जहां के भी बार बंद हो गए. राजस्थान के आबकारी अधिकारी निरंजन आर्य का कहना है कि ये सब महाराष्ट्र, केरल और तेलंगना जैसे राज्यों की वजह से हुआ है, जो सुप्रीम कोर्ट के हाईवे किनारे शराब की दुकान बंद करने के फैसले के रिव्यू के लिए सुप्रीम कोर्ट गए थे. पहले सुप्रीम कोर्ट ने केवल शराब की दुकानों पर ही आदेश दिए थे लेकिन रिव्यू पेटिशन के फैसले में होटल के बार को भी शामिल कर लिया.

आबकारी अधिकारी के अनुसार राजस्थान में महज 15 फीसदी शराब की दुकानों और होटलों पर हीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर होगा. लेकिन ली मरेडियन, फेयरमाउंट, चोखी ढाणी जैसे बड़े होटल जो करोड़ो का इनवेस्टमेंट कर रखे हैं उनका क्या होगा.

दरअसल ये मामला 2007 से हीं चल रहा था तब राजस्थान सररकार ने समझदारी दिखाते हुए तीनों नेशनल हाईवे के शहरी हिस्से को अरबन रोड बनवा लिया था इसलिए केवल बाहरी इलाके में बने बड़े होटल हीं इसके चपेट में आएंगे. नेशनल हाईवे को अरबन रोड बननाने के लिए केंद्र सरकार के भूलत परिवहन मंत्रालय से परमिशन लेना पड़ता है, लेकिन जिस तरह से देश में शराब के खिलाफ माहौल बना है. राज्य सरकार केंद्र से परमिशन लेकर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी नही मोल लेना चाहती है. हालांकि सूत्रों के अनुसार जिन बड़े होटलों के बार बंद हो रहे हैं वो 500 मीटर के दायरे के बाहर अपना बार बना सकते हैं

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