पानी की कमी से नागदा को नहीं मिला 500 करोड़ का निवेश’

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भोपाल। उज्जैन केनागदा और आसपास के क्षेत्र में जलसंकट का मुद्दा भाजपा विधायक दिलीप सिंह शेखावत ने मंगलवार को विस में उठाया। उन्होंने कहा कि इसके कारण यहां 500 करोड़ रुपए का जो निवेश आ रहा था, वह विदेश चला गया।

उन्होंने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से मुद्दा उठाते हुए बताया कि नागदा औद्योगिक शहर में बिरला समूह ने चंबल नदी पर पांच डैम बनवाए हैं जिनसे उद्योगों को पानी मिलता है। क्षेत्र के किसानों को भी सिंचाई के लिए यहीं से पानी दिया जाता है। पानी की कमी के कारण दो से तीन महीने तक उद्योग बंद रहते हैं।

शेखावत ने कहा कि कुछ समय पहले तत्कालीन जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया ने विधानसभा में नागदा के पास निनावट डैम स्वीकृत करने का ऐलान किया था। 2007 में यह स्वीकृत भी हुआ, लेकिन डीपीआर बनने के बाद भी इसका अता-पता नहीं।

इसी तरह एक नाले के डायवर्सन की आवश्यकता भी जताई तो जल संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने जयंत मलैया की घोषणा का अक्षरश: पालन की बात कही।

इसी तरह नाला डायवर्सन के लिए नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह ने अमृत योजना में काम कराने का आश्वासन दिया। लोक स्वास्थ्य मंत्री कुसुम महदेले ने नागदा के आसपास के 22 गांवों की पानी की समस्या दूर करने योजना बताई।

वन संरक्षण अधिनियम के मुताबिक काम करेंगे

कांग्रेस विधायक हिना कांवरे ने लांजी विधानसभा क्षेत्र के वन ग्राम बोदालझोला की समस्याएं बताईं और कहा कि वहां पीने का पानी, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है।

अज्ञात बीमारी फैलने के भय से कई परिवार साबरनाला में बस गए। इन्हें वहीं बसे रहने देने और खेती की जमीन मुहैया कराने की मांग को वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण अधिनियम के मुताबिक वहां रहने की अनुमति नहीं दे सकते।

 

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