पीएम मोदी ने न्यू इंडिया और डिप्रेशन को लेकर की मन की बात, बढ़ाया मातृत्व अवकाश

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नई दिल्ली। पीएम मोदी ने रविवार को 30वीं बार देश की जनता से अपने मन की बात की। इस दौरान उन्होंने देश के वीर सपूतों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के बलिदान को याद किया। पीएम ने कहा कि यह शहीद हमारी प्रेरणा हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से न्यू इंडिया का सपना साकार करने का आह्वान भी किया। इसके अलावा उन्होंने मातृत्व अवकाश को 12 से 26 हफ्ते किए जाने की भी घोषणा की।

पीएम ने कही कि न्यू इंडिया सरकार की कोई स्कीम नहीं है और ना कोई किसी मेनीफेस्टो का हिस्सा है। यह तो हर भारतीय की ताकत को दिखाता है जो साथ मिलकर एक भव्य भारत का निर्माण करेंगे। सवा सौ करोड़ देशवासी अगर संकल्प लें, इसे सिद्ध करने के लिए राह तय कर लें और कदम उठाते चलें तो न्यू इंडिया का सपना सिद्ध हो सकता है।

उन्होंने डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों में डिजिटल पेमेंट को लेकर जागरूकता आई है और किसान भी इसका उपयोग करें। स्वच्छ भारत को लेकर कहा कि लोगों के तरह-तरह के आइडिया आते हैं और यह सकारात्मक बात है कि लोगों को अब गंदगी से गुस्सा होने लगा है। यही गुस्सा स्वच्छता की तरफ और कदम बढ़ाने में मदद करेगा।

पीएम ने कहा कि स्वच्छता आंदोलन से ज्यादा आदत से जुड़ी होती है। यह आंदोलन आदत बदलने का आंदोलन है। उन्होंने देहरादून की बेटी गायत्री की बात सुनते हुए कहा की जो लोग भी उसकी बात सुन रहे हैं उनके लिए यह संदेश बने।

पीएम ने महिलाओं के लिए सरकार द्वारा मातृत्व अवकाश 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते करने के निर्णय की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला किया है। ये जो कामकाजी वर्ग की महिलाएं हैं, उनको प्रसूति के समय, गर्भावस्था के समय और डिलेवरी के समय, मेटरनिटी लीव जो पहले 12 सप्ताह मिलती थी, अब 26 सप्ताह दी जाएगी। दुनिया में शायद दो या तीन ही देश हैं, जो हम से आगे हैं। भारत ने एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण फ़ैसला हमारी इन बहनों के लिये किया है।

मोदी ने खाने की बार्बादी पर भी बात की और कहा कि खाने की बर्बादी खेदजनक है, यह गरीबों के साथ अन्याय है। मुझे पता है कि कुछ युवा तकनीक की मदद से इसे रोकने में लगे हैं।

अवसाद को लेकर बात करते हुए पीएम ने कहा कि जो लोग अवसाद से पीड़ित होते हैं वो खुद किसी से बात करने के लिए आगे नहीं आते हैं। हमें इसे बदलना होगा और उन्हें बात करने के लिए प्रेरित करना होगा। ऐसा नहीं है कि इससे मुक्ति नहीं मिलती। अवसाद को दबाना ठीक नहीं है, बल्कि इसे एक्सप्रेस करना अच्छा है।

अपने मन की बात की शुरुआत पीएम ने बांग्लादेश को उसके स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए की। उन्होंने कहा कि उसका नेतृत्व बंगबंधु ने किया था। हम बांग्लादेश के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

इसके बाद उन्होंने शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को याद करते हुए कहा कि यह लोग मौत से नहीं डरे। वो देश के लिए जिए और देश के लिए जान दे दी। हम आज चंपारण आंदोलन की भी 100 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। इस आंदोलन ने हमें बताया कि महात्मा गांधी कितने विशेष थे और उनकी शक्तियां क्या थीं।

 

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