प्रचंड जीत से संसद में BJP के लिए ऐसे बदल जाएंगे समीकरण

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नई दिल्ली
5 राज्यों के चुनावी नतीजों का असर सिर्फ राज्य में हार-जीत तक नहीं रुकेगा, बल्कि इनके नतीजों की धमक आने वाले दिनों में राज्यसभा की तस्वीर और जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव पर भी दिखाई देगी। गौरतलब है कि जहां 2017-2018 में राज्यसभा में कई सीटें खाली हो रही हैं, वहीं इसी साल राष्ट्रपति चुनाव भी होना है। ऐसे में यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी की प्रचंड जीत और गोवा और मणिपुर में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन का असर राष्ट्रपति चुनाव में दिखाई देगा।

पसंदीदा चेहरा बनेगा राष्ट्रपति
नतीजों से साफ है कि मोदी सरकार अपने पसंद के चेहरे को राष्ट्रपति बना सकती है। इसके लिए उसे विपक्षी दलों को साधने की उतनी जरूरत नहीं पड़ेगी। राष्ट्रपति के चुनाव में लोकसभा-राज्यसभा के साथ-साथ विधानसभाओं के सदस्य भी भाग लेते हैं। उल्लेखनीय है कि यूपी-उत्तराखंड को मिलाकर फिलहाल देश के 12 बड़े राज्यों में बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत की सरकार है।

हालांकि राष्ट्रपति चुनाव के लिए इलेक्टोरल कॉलेज में एनडीए का वोट शेयर अभी भी बहुमत से कम होगा, लेकिन इस अंतर को किसी गैर-यूपीए दलों जैसे बीजू जनता दल (बीजेडी) और एआईएडीएमके के साथ मिलकर पाटा जा सकता है। राष्ट्रपति का चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज ( कुल वोट 10,98,882) करता है जिसमें संसद को दोनों सदनों के सदस्य, केंद्रशासित दिल्ली-पुडुचेरी सहित सभी राज्यों के विधानसभा-विधानपरिषदों के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।

पांच राज्यों में चुनाव से पहले इलेक्टोरल कॉलेज में एनडीए का वोट वैल्यू बहुमत से 75,076 कम था। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद यह आंकड़ा सिर्फ 20,000 रह जाएगा, जिसे आसानी से भरा जा सकता है। एनडीए बीजेडी, एआईएडीएमके सहित निर्दलीय सांसदों और विधायकों से मदद ले सकता है।

2017 में खाली होंगी 9 सीटें
जहां तक राज्यसभा की तस्वीर की बात है तो साल 2017 में 9 सीटें खाली हो रही हैं। वहीं 2018 में कुल मिलाकर 60 सीटें खाली होने वाली हैं। इनमें से मौजूदा चुनाव वाले राज्यों में से प्रमुख तौर पर उत्तर प्रदेश, गोवा और उत्तराखंड में सीटें खाली हो रही है, उनमें यूपी की 11 और गोवा और उत्तराखंड की एक-एक सीट खाली हो रही हैं। गौरतलब है कि जहां लोकसभा में बीजेपी का स्पष्ट बहुमत है, वहीं राज्यसभा में बीजेपी और घटक दलों के नंबर कम होने से सरकार वहां अपने एजेंडे को आसानी से आगे नहीं बढ़ा पाएगी।

अजेंडे को आसानी से बढ़ाएंगे मोदी
माना जा रहा है कि मोदी सरकार अपने अजेंडे को आसानी से आगे बढ़ा पाएगी। सरकार अब यूनिफॉर्म सिविल कोड, ट्रिपल तलाक जैसे संवेदनशील मुद्दों के साथ राजनैतिक सुधार की दिशा में कड़े कदम उठा सकेगी। राजनीतिक दलों को होने वाले फंडिंग से जुड़े बिल से लेकर लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ कराने संबंधी फैसलों को अब मोदी सरकार आसानी को आगे बढ़ा सकेगी। फिलहाल कांग्रेस और साथी दलों के कुल नंबर 96 (कांग्रेस-60, एसपी-19, जेडीयू-10, डीएमके-4, आरजेडी-3) हैं, वहीं एनडीए की तादाद 70 (बीजेपी-56, टीडीपी-6, अकाली दल-3, शिवसेना-3) है।

खाली हो रही सीटों में सबसे ज्यादा यूपी से
अगले साल राज्यसभा में खाली हो रही सबसे ज्यादा सीटें यूपी से हैं। राज्य की कुल 11 सीटों में से 7 एसपी, 2 बीएसपी व एक-एक कांग्रेस और बीजेपी के पास हैं। प्रदेश में आए नतीजों से साफ है कि यूपी में कांग्रेस और बीएसपी के लिए अपनी एक सीट बचाना भी मुश्किल है। ऐसे में मायावती, रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल, प्रमोद तिवारी और जया बच्चन जैसे नेताओं की वापसी का संकट दिखता है। हालांकि, मौजूदा नंबरों से एसपी अपनी 1 या 2 सीटें बचा सकती है।

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