बीएमसी: मेयर बना शिवसेना का और उद्धव के सामने लगे ‘मोदी-मोदी’ के नारे

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देश की सबसे बड़ी नगरपालिका बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में मेयर चुनाव के वक्त दिलचस्प वाकया देखने को मिला. मेयर पद की वोटिंग के वक्त भले ही शिवसेना के वरिष्ठ नेता विश्वनाथ महादेश्वर की इस पद पर ताजपोशी हुई, लेकिन उस वक्त ‘मोदी-मोदी’ के नारे जमकर लगे. इस दौरान शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरेे भी मौजूद थे.

नारे लगाते वक्त बीजेपी पार्षदों में गजब का उत्साह दिख रहा था. जवाब में शिवसेना के सदस्यों ने ‘जय बाला साहेब’ के नारे लगाए. ऐसे में थोड़ी देर के लिए लगा कि कहीं भाजपा और शिवसेना के कार्यकर्ता आपस में ही ना उलझ जाए. हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हुआ. इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने कमल की माला विश्वनाथ को पहनाई.

दरअसल, भाजपा ने मेयर का चुनाव नहीं लड़ने और शिवसेना को बीएमसी में समर्थन देने का फैसला किया था. इससे 56 साल के विश्वनाथ महादेश्वर के मेयर बनने का रास्ता साफ हो गया. उनके सामने केवल कांग्रेस उम्मीदवार विट्ठल ही थे, जिन्हें उन्होंने आसानी से हरा दिया. महादेश्वर को 171 जबकि विट्ठल को सिर्फ 31 वोट हासिल हुए. समाजवादी के 6 कॉर्पोरेटर समेत महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी इस चुनाव से दूर रही.

56 साल के महादेश्वर बांद्रा वार्ड से तीन बार बीएमसी के पार्षद चुने जा चुके हैं. डिप्टी मेयर का पद भी शिवसेना की ही हिमांगी वर्लीकर को दिया गया.

महादेश्वर की नियुक्ति के साथ ही शिवसेना ने लगातार पांचवीं बार बीएमसी मेयर पद पर कब्जा बरकरार रखा है.

राजे संभाजी विद्यालय और सांताक्रूज (पूर्वी) में स्थित जूनियर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य महादेश्वर को मेयर पद के चुनाव में आसान जीत हासिल हुई, क्योंकि बीजेपी ने उनके पक्ष में मतदान किया. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के सात पार्षदों ने मतदान नहीं किया.

वोटिंग के दौरान पूर्व मेयर स्नेहल आंबेकर, नगर निगम आयुक्त अजय मेहता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी और नेता उपस्थित रहे. मेयर पद के लिए होने वाले चुनाव से चार दिन पहले बीएमसी चुनाव में मात्र दो सीट के अंतर से दूसरे स्थान पर रही बीजेपी ने खुद को चुनाव से अलग कर लिया था. बीजेपी ने कहा था कि वह बीएमसी में किसी भी तरह का पद नहीं लेगी.

बता दें कि 227-सदस्यीय बीएमसी में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. इस चुनाव में शिवसेना 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. बीजेपी को 82 सीटें मिली और वह मामूली अंतर से ही शिवसेना से पिछड़ गई. लंबी जद्दोजहद के बाद बीजेपी और शिवसेना में मेयर पद को लेकर सहमति बन पाई थी.

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