मध्यप्रदेश सरकार जल संरक्षण के लिए ‘इसरो’ की लेगी मदद

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मध्यप्रदेश में पानी की समस्या से निपटने और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार अब इसरो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन) की मदद लेगी. साथ ही प्रदेश के विकास कार्यों की मॉनिटरिंग और पारदर्शी प्रशासन की व्यवस्था सैटेलाइट के जरिए होगी. ऐसा राज्य को जीरो करप्शन बनाने के लिए किया जा रहा है.

किरण कुमार ने आगे कहा कि जल स्रोतों का सैटेलाइट से डाटा तैयार कराया जाएगा, जिससे ये पता लगाया जा सकेगा कि जल स्रोत का सही एरिया क्या है? उसमें कितना पानी है? इसकी जानकारी हर 10 दिन में अपडेट की जाएगी.

‘इसरो’ के चेयरमैन एएस किरण कुमार ने भोपाल में मीडिया से बातचीत में कहा कि फसलों के नुकसान और उनके रखरखाव के लिए ‘इसरो’ पोस्टल डिपार्टमेंट से समझौता करने जा रही है. इस व्यवस्था में किसान और सरकार के बीच पोस्टमैन मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे. पोस्टमैन खेतों में जाकर फसलों की फोटो खींचकर इसरो को भेजेगा ताकि किसानों को फसलों के रखरखाव और उसके सही दाम कहां मिलेंगे इसकी जानकारी दी जा सके.

जियो टैगिंग तकनीकी की मदद से मनरेगा में अब फर्जीवाड़ा काफी कम हो पाया. मुख्यालय में बैठे अधिकारी मनरेगा के कामों की सीधे मॉनिटरिंग करने लगे हैं. इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग भी प्रदेश के 1 लाख 20 हजार सरकारी स्कूल के निर्माण कार्यों और बुनियादी सुविधाओं की मॉनिटरिंग जीआईएस (जिओग्रॉफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम) मैपिंग के जरिए कर रहा है

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