मुख्यमंत्री योगी ने कहा वंदे मातरम् पर संकीर्णता से ऊपर उठे जनता –

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लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि एक तरफ हम 21वीं सदी में बढ़ रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ लोग इस विवाद में उलझे हैं कि वे राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम् गाएंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि हमें तरक्की के पथ पर आगे बढऩा है तो वंदे मातरम् को लेकर इस संकीर्णता से उबरना होगा।
वह राजभवन में राज्यपाल राम नाईक के विधिक परामर्शदाता एसएस उपाध्याय द्वारा अंग्रेजी में लिखी गई पुस्तक ‘द गवर्नर्स गाइड  के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने उदाहरण दिया कि कानून का राज स्थापित करने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह का शुभारंभ भी राष्ट्रगीत वंदे मातरम् से ही हुआ था। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए विधिक परामर्शदाताओं की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कभी-कभी उनकी एक चूक अर्थ का अनर्थ कर देती है और हम लोगों को विवाद का सामना करना पड़ता है। विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के विधिक परामर्शी अर्थ का अनर्थ करने में माहिर होते हैं। राज्यपाल की भूमिका सिर्फ संवैधानिक प्रमुख की नहीं है। उप्र के मौजूदा राज्यपाल ने इसे साबित भी किया है। राज्यपाल राम नाईक की ख्याति जनता के राज्यपाल के रूप में है। प्रदेश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गईं सरकारें यदि अपने मार्ग से कभी भटकी हैं तो राज्यपाल ने अपनी बेबाक टिप्पणी से उन्हें रास्ता दिखाने का काम किया है। वहीं इस राजभवन ने उन राज्यपालों को भी देखा है जिन्होंने जिन्होंने चुनी हुई सरकारों को भंग किया और जिन्हें न्यायपालिका के हस्तक्षेप से बहाल किया जा सका। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का आधार कानून का राज है जिसे स्थापित करने के लिए जरूरी है कि हर संस्था अपने कर्तव्यों का पालन करे। यदि ऐसा होगा तो अधिकारों का टकराव नहीं होगा। उन्होंने नागरिकों को उनके दायित्वों का बोध कराने के लिए भी पुस्तक लिखे जाने की जरूरत बतायी।

चर्चित फैसलों के पीछे ठोस कानूनी सलाह : नाईक
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि राजभवन में उनके कार्यकाल के दौरान उनके जितने फैसले चर्चित हुए उसके पीछे ठोस कानूनी सलाह रही जिसका 90 फीसद श्रेय उनके विधिक परामर्शदाता को जाता है। बकौल राज्यपाल वह अपने कामकाज से संतुष्ट हैं। राज्यपाल के रूप में अब तक के कार्यकाल के दौरान उन्हें कई ऐसे निर्णय करने पड़े जो चर्चित रहे। चाहे वह विधान परिषद में सदस्यों को नामित करने का मामला रहा हो या दुष्कर्म के आरोपी मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखने का या फिर सत्रहवीं विधानसभा के चुनाव के बाद निवर्तमान विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नेता विरोधी दल को मान्यता देने का। कार्यक्रम को विधानसभा अध्यक्ष ह्रïदयनारायण दीक्षित, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व डॉ.दिनेश शर्मा ने भी संबोधित किया।

ऐसे न्यायिक अधिकारी पर गर्व : जस्टिस भोंसले
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दिलीप बी.भोंसले ने कहा कि यह पुस्तक राज्यपाल के अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में संवैधानिक प्रावधान का उल्लेख ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के आदेशों की रौशनी में उनका विश्लेषण भी करती है। उन्होंने पुस्तक के लेखक और न्यायिक सेवा के अधिकारी एसएस उपाध्याय की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे न्यायिक अधिकारियों पर उन्हें व न्यायपालिका को गर्व है।

पूर्व चीफ जस्टिस ने छह बार लिखा था मुख्यमंत्री को पत्र
पुस्तक ‘द गवर्नर्स गाइड की समीक्षा करते हुए डा.राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.गुरदीप सिंह ने कहा कि राज्यपाल सरकार के कामकाज का मूकदर्शक नहीं होता। न ही वह मंत्रिमंडल की हर सलाह मानने के लिए बाध्य है। राज्यपाल राज्य के हितों का संरक्षक होता है और यदि सरकार की कोई सलाह उसे अनुचित लगती है तो वह अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर अखिलेश सरकार और राजभवन के बीच चली तनातनी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पुस्तक में उल्लेख है कि इस मसले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़ ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को छह बार पत्र लिखकर लोकपाल की नियुक्ति पर चर्चा के लिए बैठक बुलाने के लिए कहा। चीफ जस्टिस और नेता प्रतिपक्ष की असहमति के बावजूद मुख्यमंत्री ने जस्टिस रवींद्र सिंह को लोकायुक्त नामित करने का प्रस्ताव राजभवन भेज दिया था जिसे राज्यपाल ने नामंजूर कर दिया था।

पत्नी, योगी और ठिठोली
विमोचन समारोह के दौरान लोहिया विधि विश्वविद्यालय के कुलपति ने पुस्तक के लेखक की इस बात पर खिंचाई की कि उन्होंने अपनी धर्मपत्नी को इसका श्रेय नहीं दिया। उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने कहा कि धर्मपत्नी के मामले में उनका अनुभव सिर्फ छह साल का है। उन्होंने कहा कि पत्नी तो सहकर्मों को धारित करती ही है लेकिन, ऐसा नहीं है कि हर पुरुष की सफलता के पीछे पत्नी ही होती है। यदि ऐसा होता तो हम लोगों को मुख्यमंत्री के रूप में योगी जी कैसे मिलते। उनके मुंह से यह निकलते ही मंच पर बैठे राज्यपाल, मुख्यमंत्री समेत हॉल में मौजूद सभी अतिथियों ने ठहाका लगाया।

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