यूपी चुनाव: बीजेपी के ये पांच ‘ब्रह्मास्त्र’ पूर्वांचल में पलट सकते हैं बाजी

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यूपी का सियासी रण अब छठे चरण तक पहुंच गया है. इन दो चरणों में विधानसभा की 89 सीटों पर चुनाव होने हैं. पूर्वांचल को यूपी की सत्ता का गेटवे कहा जाता है. इस क्षेत्र से यूपी विधानसभा में करीब 40 फीसदी सीटें आती हैं. बीजेपी ने इन दो चरणों के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है. प्रचार के लिए पीएम मोदी को वाराणसी में लोकल के तौर पर उतारने की तैयारी है तो पूर्वांचल के अलग-अलग हिस्सों में एक दर्जन से ज्यादा मंत्री कैंपेन संभाले हुए हैं. पूर्वांचल को लेकर बीजेपी की रणनीति के 5 ऐसे पहलू हैं जो यूपी चुनाव में बाजी पलट सकते हैं:

1. मोदी इफेक्ट
2014 के आम चुनाव में जब बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को पीएम कैंडिडेट बनाया तो गुजराती की छवि से बाहर लाने की रणनीति के तहत यूपी से चुनाव लड़ाया गया और इसके लिए वाराणसी की सीट को चुना गया. इस फैसले के पीछे एक रणनीति ये भी थी कि पूर्वांचल की सीटों पर बीजेपी का दबदबा बढ़ाया जाए. पूरे यूपी में मोदी का जादू चला और 80 में से लोकसभा की 73 सीटें बीजेपी ने अपने खाते में कर लीं. अब विधानसभा चुनाव में भी वहीं जादू दोहराने की तैयारी है. पूर्वांचल से 170 सीटें आती हैं और इसके लिए टीम मोदी ने खुद कैंपेन संभाल रखा है. वाराणसी पीएम का संसदीय क्षेत्र है. शनिवार से पीएम मोदी वाराणसी में कैंपेन के लिए उतरेंगे और लोकल अवतार में उन्हें पेश किया जाएगा. दो चरणों में 89 सीटें हैं और अगर बीजेपी की ये रणनीति कामयाब रहती है तो चुनावी समीकरण में काफी फर्क पड़ने वाला है.

2. सांप्रदायिक कार्ड
यूपी चुनाव को शुरुआत से विकास के मुद्दे पर लड़ने का दावा करती आ रही बीजेपी अचानक पूर्वांचल आते-आते सांप्रदायिक कार्ड पर क्यों उतर आई इसके भी पर्याप्त कारण हैं. खुद पीएम मोदी ने श्मशान, कब्रिस्तान, रमजान और दिवाली के मुहावरे से सियासी बयानों के तीर एक अलग दिशा में मोड़ दिए. इसके बाद साक्षी महाराज सामने आए और कह डाला कि कब्रिस्तान से जगह की बर्बादी होती है. बीजेपी की इस रणनीति की काट के लिए अखिलेश ने दांव चला और गुजरात के गधों का मुहावरा छेड़कर बहस की दिशा मोड़ने की कोशिश की. इन दो चरणों में सांप्रदायिक कार्ड के पीछे बीजेपी की रणनीति वाराणसी-आजमगढ़-मऊ-गोरखपुर जैसे जिलों में ध्रुवीकरण कर फायदा उठाने की हो सकती है.

3. मोदी कैबिनेट का पूर्वांचल मिशन
पीएम मोदी ही नहीं कैबिनेट के 12 मंत्री पूर्वांचल में पार्टी का प्रचार अभियान संभाले हुए हैं. इस रणनीति को अमली जामा पहनाने का काम पिछले साल तभी शुरू हुआ था जब पीएम मोदी ने बलिया से उज्जवला मिशन की शुरुआत की थी. इसके बाद गोरखपुर में खाद कारखाना और एम्स देकर इलाके में अपनी पकड़ बनाने की दिशा में टीम मोदी ने कदम आगे बढ़ाया. स्मार्ट सिटी की लिस्ट में बनारस को शामिल किया गया. पीएम मोदी अपनी रैलियों में अक्सर कहते हैं कि इस इलाके की तस्वीर बदलने का जिम्मा उन्होंने उठाया है. अब टीम मोदी गांव-गांव में जाकर लोगों को केंद्रीय योजनाओं की जानकारी देने में लगी है. इस राणनीति के तहत संघ को भी जमीन पर उतारा गया है ताकि पूर्वांचल में बसपा की पैठ खत्म कर यूपी में कमल खिलाया जा सके.

4. कटप्पा के बहाने बाहुबलियों पर निशाना
27 फरवरी को मऊ से मोदी ने अपने पूर्वांचल मिशन की शुरुआत की और फिल्म बाहुबली के पात्र कट्टपा का जिक्र करते हुए कहा कि ये कटप्पा पूर्वांचल के बाहुबलियों का खात्मा करेगा. जाहिर है पीएम का इशारा बाहुबलियों के दम पर पूर्वांचल जीतने की कोशिश में लगी बीएसपी पर था. बीएसपी ने मुख्तार अंसारी को पार्टी में लाकर गाजीपुर, मऊ और गोरखपुर में जीत की रणनीति बनाई है. पीएम मोदी का ये कट्टपा वार लोगों में बाहुबलियों के साम्राज्य के खात्मे का संदेश देगा और इसके लिए बीजेपी लोगों में पैठ बनाने की कोशिश में है.

5. भोजपुरी स्टार अट्रैक्शन
पूर्वांचल में भोजपुरी स्टार अट्रैक्शन भी बीजेपी की रणनीति का एक अहम हिस्सा है. यूपी चुनाव से ठीक पहले भोजपुरी अभिनेता और गायक मनोज तिवारी को दिल्ली बीजेपी की कमान सौंपी गई और पूर्वांचल में प्रचार के लिए उतार दिया गया. पूर्वांचल की ओर अभी सियासी रथ बढ़ा ही था कि दूसरे भोजपुरी स्टार रविकिशन की बीजेपी में एंट्री हुई और साफ हो गया कि बीजेपी स्थानीय भाषा से जुड़े इन स्टार्स का पूरा फायदा चुनाव में उठाने की तैयारी में है.

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