वन्यप्राणियों की निगरानी ड्रोन से करेगी सरकार

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भोपाल। प्रदेश के खुले वन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुओं सहित अन्य वन्यप्राणियों और लकड़ी चोरों की निगरानी ड्रोन से करने की तैयारी है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के विशेषज्ञों की देखरेख में पन्ना टाइगर रिजर्व में इसका परीक्षण सफल रहा है। अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद ड्रोन खरीदने का निर्णय लिया जाएगा।

मैदानी अमला कम होने के कारण जंगल और जंगली जानवरों की हिफाजत में वन विभाग को दिक्कत आ रही है, इसलिए प्रदेश के जंगलों की देखरेख ड्रोन से करने पर विचार किया जा रहा है। बाद में इसे टाइगर रिजर्व और अभयारण्य की निगरानी में भी लगाया जा सकता है।

वन अफसरों का मानना है कि इससे न सिर्फ जंगली जानवरों की निगरानी ठीक से की जा सकेगी, बल्कि जंगल में अतिक्रमण, लकड़ी चोरी और अवैध उत्खनन की भी निगरानी हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में वन क्षेत्रपाल, उप वन क्षेत्रपाल, वनपाल और वनरक्षक के 20,670 में से 3635 पद खाली हैं।

देवास में बाघ की निगरानी की

विभाग ने ड्रोन की मदद से देवास में बाघ की निगरानी की। देवास के नागदा में बाघ का मूवमेंट था। जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल था। विभाग ने यहां ड्रोन के साथ टीम तैनात की। जिसने बाघ की पूरी गतिविधि पर नजर रखी। ऐसे ही शंकरगढ़ में किए जा रहे उत्खनन की निगरानी भी ड्रोन से की गई।

इनका कहना है

अभी परीक्षण किया जा रहा है। विशेषज्ञ ड्रोन से निगरानी करने की सलाह देंगे, तब विचार करेंगे।

– दीपक खांडेकर, अपर मुख्य सचिव, वन

 

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