विलुप्तता के कगार पर राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की प्रजाति

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जगदलपुर। राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की संख्या बढ़ाने के लिए किये जा रहे प्रयासों को लगातार झटका लग रहा है। पहाड़ी मैना  के प्रजनन के लिए कैप्टिव ब्रीडिंग की तकनीक इस्तेमाल की जा रही है। इसके लिए वन विद्यालय में एक विशाल पिंजरा बनाया गया है।
शुरूआत में इस पिंजरे में पायल, काजल व मैना नाम के तीन पक्षियों को रखा गया था। एक-एक कर इन तीनों को प्राकृतिक व एक की सांप के काटने से मौत हो गई। इसके बाद वहां दो और पहाड़ी मैना  को लाकर रखा गया है। इनके नाम नंदिनी व आर्या रखे गये हैं। इनमें से कुछ समय पहले नंदिनी की भी मौत हो गई। इसके बाद इस बड़े पिंजरे में आर्या ही रह गया है। साथियों की मौत से एकाकी हुए आर्य की चहचहाहट इन दिनों सुनाई नहीं दे रही है।
बस्तर में पाई जाने वाली पहाड़ी मैना की संख्या लगातार घटती जा रही है। आवाज की हूबहू नकल करने की खासियत करने के चलते पहाड़ी मैना  को पालतू बनाने इसकी तस्करी की जाती रही है। राज्य गठन के बाद से राजकीय पक्षी का दर्जा दे दिया गया। इसके बाद इसे बचाने के प्रयास तेज कर दिये। बचाव के अलावा इसके प्रजनन के प्रयास भी जोर-शोर से किये गये। इस बीच पिंजरे में इसके जोड़े को रखकर कैप्टिव ब्रीडिंग करवाने पिंजरा बनाया गया था। पिंजरे में मैना को लाकर रखे जाने के बाद भी प्रयास असफल रहे।

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