संजय दत्त की बढ़ी मुश्किल, फिर जाएंगे जेल?

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मुंबई
महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट से कहा कि अगर उसका मानना है कि राज्य सरकार ने अभिनेता संजय दत्त को सजा में जल्दी माफी देकर गलती की तो वह दत्त को वापस जेल जाने का निर्देश दे सकता है। राज्य सरकार ने यह टिप्पणी उस समय की जब अदालत ने उससे पूछा कि 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में दोषी दत्त को 5 साल की सजा भुगतने के लिए समर्पण करने के दो महीने के भीतर ही कैसे जल्दी-जल्दी परोल और एक के बाद एक फरलो दिया गया। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि एक दोषी के अच्छे आचरण और व्यवहार का कैसे पता लगाया जाता है और किस आधार और मानदंड पर अभिनेता को जल्दी सजा में माफी दी गयी।

जस्टिस आर. एम. सावंत और जस्टिस साधना जाधव की खंडपीठ ने कहा कि दत्त ने मई 2013 को आत्मसमर्पण किया था और जुलाई में उन्होंने फरलो और परोल पर रिहा किए जाने के लिए अर्जियां दी थी। जस्टिस जाधव ने कहा, ‘8 जुलाई 2013 को उन्होंने फरलो के लिए अपील की और 25 जुलाई को परोल पर रिहाई की अपील की। दोनों अर्जियां स्वीकार कर ली गई और वह भी साथ-साथ।’ जस्टिस जाधव ने कहा, ‘जेल प्रशासन दोषी के आत्मसमर्पण करने के दो महीनों के भीतर कैसे अच्छे व्यवहार और आचरण का पता लगा सकता है? आम तौर पर जेल अधीक्षक अर्जियों को आगे भी नहीं बढ़ाते हैं। अधिकारी आवेदन फेंक देते हैं।’

महाधिवक्ता आशुतोष कुम्बकोनी ने अदालत को बताया कि दत्त के साथ कोई खास बर्ताव नहीं किया गया, लेकिन अगर अदालत को लगता है कि राज्य सरकार ने अभिनेता को जल्द रिहाई देकर गलती की है तो वह दत्त को वापस जेल भेज सकती है। जस्टिस सावंत ने कहा, ‘हम समय को पीछे नहीं ले जाना चाहते। हम इस समय दत्त को वापस भेजने का सुझाव नहीं देते लेकिन हम चाहते हैं कि ऐसे मुद्दे बुद्धिसंगत हो ताकि भविष्य में कोई सवाल ना उठें।’

जस्टिस ने कहा, ‘हम केवल यह जानना चाहते हैं कि किस आधार और कसौटी पर उन्हें अच्छे आचरण के लिए जल्दी रिहा किया गया? इस अच्छे आचरण और व्यवहार का कैसे पता चलता है? हमारी अंतरात्मा को संतुष्ट होना चाहिए कि ये सभी कानून के अनुसार होना चाहिए।’ हाई कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में फरलो और परोल तब भी नहीं दी जाती जब दोषी के माता या पिता मृत्यु शय्या पर होते हैं। बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। अदालत शहर के निवासी प्रदीप भालेकर की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें सजा काटने के समय दत्त को बार-बार दी गई परोल और फरलो पर सवाल उठाया गया है। याचिका में भालेकर ने आरोप लगाया है कि दत्त को जल्दी रिहा करके जेल विभाग ने उन्हें अनुचित लाभ दिया है।

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