समयमान-वेतनमान में नहीं मिलेगा फायदा, लागू होगा पुराना फॉर्मूला

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सातवें वेतनमान में राज्य के कर्मचारियों को मूलवेतन में तो बढ़ोतरी मिलेगी, लेकिन समयमान-वेतनमान पुराने फॉर्मूले से ही तय होगा। फिर चाहे कर्मचारियों को पहला समयमान देना हो या तीसरा। यह मूलवेतन में तीन फीसदी की वृद्धि के साथ तय होगा। वहीं सातवें वेतनमान में दो संवर्गों का पे-बैंड मर्ज करने के कयास भी गलत साबित हुए। फिलहाल प्रदेश के 4 लाख 50 हजार नियमित कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।

छठवें वेतनमान में कर्मचारियों को मूलवेतन, ग्रेड-पे, 136 फीसदी डीए और एचआरए दिए जा रहे हैं। जबकि सातवें में ग्रेड-पे नहीं मिलेगा। डीए भी 4 फीसदी रह जाएगा और एचआरए अभी तय नहीं है। फिर भी वेतन में ढाई से 19 हजार रुपए तक की वृद्धि हो रही है।

ऐसे कर सकते हैं अपने वेतनमान की गणना

सातवें वेतनमान में आपका कितना वेतन निर्धारित होगा। आप खुद आकलन कर सकते हैं। सहायक सांख्यिकीय अधिकारी को छठवें वेतनमान में 39,600 रुपए वेतन मिल रहा है। जबकि सातवें वेतनमान में इनका वेतन छठवें वेतनमान के मूलवेतन और डीए के जोड़ की राशि में 2.57 का गुणा कर तय होगा।

इस पर चार फीसदी डीए और पिछले डेढ़ साल में मिली दो वेतनवृद्धि की 6 फीसदी राशि जुड़ेगी, तो वेतन 47 हजार 410 रुपए हो जाएगा। ऐसे ही सहायक ग्रेड-दो को वर्तमान में 38 हजार 704 रुपए वेतन मिल रहा है। सातवें में 16 हजार 400 मूलवेतन में 2.57 की गुणा और 1686 डीए जोड़कर 43 हजार 834 रुपए वेतन बनेगा।

कार्यभारित, स्थाई कर्मी को तीन माह बाद

प्रदेश के कार्यभारित और स्थाई कर्मियों को तीन माह बाद सातवें वेतनमान का लाभ दिया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अब तक सरकार स्तर पर विचार भी शुरू नहीं हुआ है। फिर भी सरकार वादे कर रही है।

कर्मचारी नाराज, आदेश का इंतजार

सातवें वेतनमान में मांगों को तवज्जो नहीं देने से कर्मचारी नाराज हैं। उनके मुताबिक आखिर तक सरकार ने बताया कि 60 कैडर के वेतनमान में सुधार किया जा रहा है और एक जुलाई को पुनरीक्षित वेतन संरचना में 6 माह या उससे अधिक अवधि पूर्ण करने वाले कर्मचारी को वेतनवृद्धि की पात्रता दी जा रही है। सातवें वेतनमान में दोनों ही वादे पूरे नहीं किए गए हैं। अब कर्मचारी आदेश जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद प्रदेश में एक बार फिर आंदोलन की शुरूआत होगी।

वित्तमंत्री से मिले कर्मचारी: नाराजगी-बधाई साथ-साथ

सातवें वेतनमान में मांगें पूरी न होने से कर्मचारी नाराज हैं। फिर भी मंगलवार को मप्र अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चे का प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री जयंत मलैया से मिला। उन्हें सातवें वेतनमान के लिए बधाई दी और लगे हाथ नाराजगी भी जता दी। सूत्र बताते हैं कि कर्मचारियों ने मांगों पर ध्यान न देने के लिए आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

पे-बैंड, ग्रेड-पे में सुधार करना था

सरकार ने वह दिया है, जो उन्हें देना था। कर्मचारियों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। 60 कैडर के कर्मचारियों के पे-बैंड और ग्रेड-पे में सुधार करना था, जो नहीं किया गया। हम आदेश का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद जरूरत पड़ेगी तो आंदोलन होगा। – जितेंद्र सिंह, अध्यक्ष, मप्र अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा

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