स्पेस में भी बचे रहे चूहों के स्पर्म, क्या इंसानों के बच्चे वहां ले सकेंगे जन्म

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लंदन। फ्रीज किए गए सूखे हुए चूहों के स्पर्म को नौ महीनों तक स्पेस में रखा गया, इसके बाद उसे धरती पर लाकर स्वस्थ चूहों के बच्चों का जन्म संभव हुआ है। यह जानकारी जापानी शोधकर्ताओं ने दी। मगर, अब सवाल उठ रहा है कि क्या इंसानों के मामले में भी ऐसा किया जा सकता है।

यदि हां तो क्या अंतरिक्ष में भी गर्भाधान संभव है? क्या जीरो ग्रेविटी में पैदा होने वाले बच्चे पृथ्वी में जन्म लेने वाले बच्चों की तुलना में अलग विकसित होंगे? नासा और अन्य वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियां 2030 के दशक तक लोगों को मंगल ग्रह पर भेजने के लिए काम कर रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि लाल ग्रह पर जीवन के अस्तित्व के महत्वपूर्ण सवाल की अक्सर अनदेखी की जाती है।

रॉकेट वैज्ञानिकों को यह पता नहीं है कि इंसान मंगल ग्रह पर कैसे जिएंगे और कैसे सांस लेंगे। इसके अलावा यह भी पता नहीं है कि दो-तीन साल की यात्रा के दौरान मिलने वाले शक्तिशाली कॉस्मिक विकिरण का सामना वे कैसे करेंगे? द जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन एंड हेल्थ साइंसेज में एमरजेंसी मेडिसिन के सहायक प्रोफेसर क्रिस लेहेंहार्ट ने कहा दूसरे ग्रहों पर बस्ती बसाने के लिए अहम है कि वहां बच्चों का जन्म हो।

स्पेसएक्स के प्रमुख एलोन मस्क मंगल पर बस्ती बसाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। यह गहरे अंतरिक्ष या माइक्रोग्राविटी में पैदा होने वाले मनुष्यों की नई प्रजाति की क्षमता के बारे में नैतिक प्रश्न उठाती है। उन्होंने कहा कि यदि आपका लक्ष्य अंतरिक्ष में रहने वाली प्रजाति को तैयार करना है, तो यह जरूरी है कि इस क्षेत्र में अध्ययन किया जाए।

 

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