11वीं और 12वीं में अब नहीं चलेगी फिलॉसफी

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कोरबा। सीबीएसई प्रणाली से पढ़ाई कर रहे हायर सेकेंडरी कक्षाओं के विद्यार्थी अब फिलॉसफी यानि दर्शनशास्त्र समेत सात अकेडमिक विषयों का चयन नहीं कर सकेंगे। बोर्ड ने इन विषयों के चयन को लेकर विद्यार्थियों की कम होती रूचि के मद्देनजर विकल्प से हटा दिया है। हटाए गए विषयों के स्थान पर अन्य क्षेत्रों को शामिल करने की बात कही जा रही है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल का यह निर्णय आगामी सत्र से लागू कर दिया जाएगा। इन विषयों में रूचि रखने वाले छात्र-छात्राओं को 11वीं व 12वीं में चयन कर पढ़ाई करने का मौका दिया जाता था। विषयों को समाप्त करने के पीछे यह तर्क दिया गया है कि इनका चयन काफी कम विद्यार्थी कर रहे थे। देश के कुछ चुनिंदा विश्वविद्यालयों में दाखिले के दौरान कई अकादमिक विषयों को मान्यता नहीं दी जाती।

ऐसे में संबंधित विषय भी अंकों में कटौती का कारण बनते हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों को परेशान होना पड़ता है। इस निर्णय पर सीबीएसई ने संबद्ध स्कूलों को सर्कुलर जारी करते हुए जानकारी भेज दी है। बोर्ड का कहना है कि अप्रैल में प्रारंभ होने वाले नए सत्र से इन विषयों की पढ़ाई नहीं होगी। इसके साथ ही सत्र 2016-17 में जिन विद्यार्थियों ने यह विषय चुना, उनकी पढ़ाई जारी रहेगी। उसके बाद के सत्र से इन विषयों को पूरी तरह हटा लिया जाएगा।

34 वोकेशनल कोर्स भी समाप्त

अकादमिक विषयों के साथ बोर्ड ने 11वीं व 12वीं में शिक्षा के साथ आत्मनिर्भरता की सीख देने वोकेशनल कोर्स का संचालन भी शुरू किया था। स्कूलों में विकल्प के तौर पर शामिल किए गए 34 प्रकार के वोकेशनल विषय भी सत्र 2017-18 से समाप्त कर दिए जाएंगे। हटाए जा रहे वोकेशनल कोर्स के स्थान पर अन्य विषयों को जगह दे दी जाएगी। इन वोकेशनल विषयों के जरिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ कौशल उन्नयन की दिशा में आगे लाते हुए स्कूल में ही प्रशिक्षण की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। केंद्र शासन व मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर दी गई व्यवस्था के पीछे यह मंशा रही कि स्कूली छात्र हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरा करने के साथ अपने पसंदीदा क्षेत्र में कुशल होकर इतना पारंगत हो जाए कि जरूरत पड़ने पर वह आत्मनिर्भर बन सके।

इन विषयों को हटाया गया

बोर्ड के निर्देश पर स्कूलों से हटाए गए सात अकादमिक विषयों में फिलॉसफी, किएटिव राइटिंग एंड ट्रांसलेशन स्टडी, हेरीटेज क्रॉफ्ट, ग्राफिक डिजाइन, ह्‌यूमन राइट्स एंड जेंडर स्टडीज, थिएटर स्टडीज, लाइब्रेरी एंड इंफॉरमेशन साइंस शामिल है। खासकर ह्‌यूमन राइट्स एंड जेंडर स्टडीज जैसे विषय उन अधिकारों व लक्षणों पर आधारित हैं, जिनके जरिए प्रताड़ना, शोषण और लिंग भेद जैसी मुश्किलों से बच्चे बच सके। लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए इस विषय को स्कूल शिक्षा में शामिल किया गया है। केंद्रीय बोर्ड के बाद बीते वर्षों में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने भी इससे जुड़े टॉपिक अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इसका प्रमुख उद्देश्य यही है कि किसी भी प्रकार के शोषण के कारण असहज महसूस कर प्रताड़ित हो रहे बच्चे उससे पहचान कर विरोध दर्ज कराएं।

सीसीटीवी नहीं तो रद्द हो सकती है मान्यता

नए सत्र में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर सीबीएसई में संबद्धता प्राप्त स्कूलों को कुछ कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत पिछले एक अर्से से स्कूल बस में सुरक्षा इंतजाम बेहतर करने की कवायद पर उदासीनता बरत रहे स्कूलों को सख्त समझाइश दी गई है। बोर्ड ने कहा है कि जल्द से जल्द स्कूल बस में सीसीटीवी कैमरे की चौकसी सुनिश्चित की जाए। बस की गति को सुरक्षित स्थिति पर रखने पहले ही स्पीड गर्वनर अनिवार्यता लागू है। बावजूद इसके कई स्कूल प्रबंधन इसे नजरअंदाज करते आ रहे। नियमानुसार स्कूल बस की अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए, जिसके विपरीत बेतहाशा दौड़ते वाहन बच्चों की जिंदगी खतरे में डाल रहे। बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की बजाय लापरवाही बरतने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द कर दिए जाने की चेतावनी भी दी गई है।

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