3 माह की सजा,तीन चिटफंड कंपनियों से होगी 25 करोड़ की रिकवरी

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इटारसी। जिन निवेशकों का पैसा चिटफंड कंपनियों के मालिकों ने धोखे से हड़प लिया था, उन लोगों के लिए अच्छी खबर है। होशंगाबाद कलेक्टर अविनाश लवानिया ने पीड़ितों की शिकायत के बाद जांच में तीन चिटफंड कंपनियों को दोषी पाया है। इन चिटफंडियों को 3 माह की सजा, एक हजार स्र्पए अर्थदंड लगाया है। साथ ही इन चिटफंडियों से 25 करोड़ स्र्पए की रिकवरी के आदेश जारी किए हैं।

जिन डायरेक्टर के खिलाफ कलेक्टर ने फैसला सुनाया है, वे सभी देवास की जेल में बंद हैं। कलेक्टर ने यह फैसला मप्र निक्षेपकों के हितों के संरक्षण अधिनियम के तहत सुनाया है। वहीं धोखाधड़ी के मामले में कलेक्टर ने एसपी को आदेश दिया है कि इन कंपनियों के डायरेक्टरों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। यह विवेचना छह माह के भीतर पूरी करें।

पीड़ितों के अधिवक्ता रमेश साहू ने बताया कि होशंगाबाद कलेक्टर ने 25. 09 करोड़ की रिकवरी एवं 12 प्रतिशत ब्याज के साथ निवेश राशि की वसूली के आदेश 10574 पॉलिसियों के सत्यापन एवं आंकलन से सहमत होकर पारित किए हैं। साथ ही बिना सूचना दिए होशंगाबाद जिले में वित्तीय व्यवसाय करने के जुर्म में प्रत्येक डायरेक्टर को तीन-तीन माह की सजा एवं 1000 स्र्पए का जुर्माना किया है।

एक ही कार्यालय से चलती थी तीनों कंपनियां

तीनों कंपनियां एक ही कार्यालय से दूध उत्पाद एवं गोल्ड दिए जाने के नाम पर आरडी/एफडी के रूप में गरीब निवेशकों से राशि जमा कराती रही। जब वापसी की बारी आई तो कंपनी कार्यालयों में ताला लगाकर भाग गई। आरंभिक रूप से पीड़ित निवेशकों की ओर से प्रतिनिधि के रूप में विनय मालवीय, नारायण बावरिया, महेश मालवीय, प्रकाश मालवीय, छोटेलाल केवट एवं सुनील वाणी सामने आए।

इन लोगों ने मप्र निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 एवं नियम 2003 के तहत प्रकरण समक्ष प्राधिकारी (कलेक्टर) होशंगाबाद के समक्ष अधिवक्ता रमेश के साहू के माध्यम से दर्ज कराया। त्वरित संज्ञान लेकर कलेक्टर होशंगाबाद ने 23 जनवरी 2017 को एसडीएम इटारसी को कंपनियों के पीड़ित निवेशकों की निवेश राशि एवं दावा राशि के आकलन और सत्यापन के लिए अधिकृत किया।

इसमें हजारों पॉलिसीधारक अपना पहचान पत्र व पॉलिसी लेकर पहुंचे और 7 दिन का सत्यापन कार्य चला। कंपनी के डायरेक्टर सतनाम सिंह रंधावा, देवेन्द्र कुमार बजाज, पंकज चौधरी, बलजीत शर्मा, डीके बजाज सहित अन्य सहयोगी पूर्व से ही देवास जेल में बंद हैं। यहां जेल अधीक्षक के माध्यम से उन्हें नोटिस दिये गये।

कलेक्टर द्वारा कंपनी के सभी पतों पर भेजे गए नोटिस कार्यालय बंद होने के कारण वापस आए तथा कंपनी के डायरेक्टरों के विस्र्द्ध देवास, हाट पीपल्या, हरदा, खरगौन, विजयनगर इंदौर, माधवनगर, धमतरी छग, मंदसौर, बांसवाडा राजस्थान सहित अनेको थानों में धोखाधड़ी गबन के अनेकों अपराध दर्ज हैं।

देवास कलेक्टर आशुतोष अवस्थी ने उक्त चिटफंड कंपनियों पर शिकंजा कसते हुए अधिनियम की धारा 4 के तहत दिनांक 24 अगस्त 16 से 04 अक्टूबर 16 तक तेरह संपत्तियां कुर्क की है तथा जिनकी नीलामी की प्रक्रिया जिला न्यायाधीश देवास के अधीन प्रचलित है।

कलेक्टर के आदेश में क्या है खास

– 10574 पालिसी धारकों को उनकी दावा राशि 25,09,44,804 स्र्पए मय 12 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने के आदेश।

– कंपनी के सभी डायरेक्टरों के विस्र्द्ध अभियोजन की कार्यवाही।

– पीड़ित निवेशकों की निवेश राशि की वापसी में व्यतिक्रम किए जाने पर मध्यप्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 नियम 2003 की धारा 3(3) के उल्लंघन पर प्रत्येक डायरेक्टर पर 1000 स्र्पए का जुर्माना एवं तीन-तीन माह की सजा ।

– देवास में कुर्क संपत्ति की नीलामी से होगी दावा राशि की वसूली ।

अब आगे क्या होगा

– डायरेक्टरों के विस्र्द्ध अभियोजन के आदेश दिए गए हैं तथा पुलिस अधीक्षक होशंगाबाद को मामला (प्राथमिकी) दर्ज कर धारा 6(2) में विवेचना हेतु भेजा जावेगा और अपराधियों के विस्र्द्ध आपराधिक प्रकरण भी चलेगा।

इन धाराओं में हो सकता है प्रकरण दर्ज

– मप्र निक्षेपकों के हितो का संरक्षण अधिनियम 2000 व नियम 2003 की धारा 6(1) में एक लाख का जुर्माना एवं 6 वर्ष का कारावास।

– धारा 420 छल करना – 7 वर्ष एवं जुर्माना।

– धारा 406 आपराधिक न्यास भंग – 3 वर्ष एवं जुर्माना।

– धारा 409 व्यापारी द्वारा आपराधिक न्यास भंग – 10 वर्ष एवं जुर्माना।

– धारा 467 मूल्यवान प्रतिभूति (पालिसी) की कूट रचना – 10 वर्ष एवं जुर्माना।

– धारा 468 छल के प्रयोजन से कूट रचना – 7 वर्ष एवं जुर्माना।

– धारा 471 कूट रचित दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना।

– धारा 472 कूट रचना के आशय से दस्तावेज कब्जे में रखना ।

– धारा 34

इनका कहना है

मप्र निक्षेपकों के हितों के संरक्षण अधिनियम 2000 एवं नियम 2003 प्रभावी कानून है। इसके तहत हमने 10574 पीड़ित निवेशकों की ओर से प्रकरण पेश किया, जिस पर कलेक्टर महोदय ने सक्रियता से शीघ्र और सुलभ न्याय देकर विधिसम्मत आदेश पारित किया है। आदेशानुसार वसूली कर्रवाई देवास में करना होगी। इसके अलावा धोखाधड़ी के मामले में कंपनियों के डायरेक्टर पर अलग से आपराधिक प्रकरण चलेगा।

रमेश के साहू, पीड़ित निवेशकों के अधिवक्ता

कलेक्टर ने हमें न्याय दिलाया

कंपनी गरीबों का पैसा खाकर भागी है, कलेक्टर कोर्ट से हमें न्याय मिला है। अब जल्दी पैसा वापस मिले यही चाहते है।

विनय मालवीय, पीड़ित निवेशक

कंपनी के ये कर्ता-धर्ता देवास जेल में बंद हैं

– सतनाम सिंह रंधावा चेयरमेन एवं डायरेक्टर

– देवेश कुमार बजाज जनरल मैनेजर

– बलजीत शर्मा जोनल मैनेजर एमपी हेड

– डीके बजाज

– पंकज चौधरी

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