BJP को महागठबंधन से रोकने की तैयारी में कांग्रेस

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5 राज्यों के हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद कांग्रेस 2019 की रणनीति बनाने में जुट गई है। बीजेपी को रोकने के लिए उसने क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर ‘महागठबंधन’ बनाने के संकेत दिए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हमारे सहयोगी ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को बताया कि एसपी, बीएसपी और कांग्रेस महागठबंधन के रूप में उभर सकती है। यूपी चुनाव के बाद अब किसी पार्टी को यह ‘भ्रम’ नहीं है कि वह अकेले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी से जीत सकती है।

कांग्रेस का मानना है कि यदि अभी नहीं सतर्क हुए तो फिर 2024 तक इंतजार करना होगा। कांग्रेस महासचिव और प्रवक्ता सी. पी. जोशी ने संकेत दिया कि कांग्रेस की कोशिश सभी राज्यों के क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की रहेगी। दरअसल, कांग्रेस को लगता है कि जैसे बिहार में आरजेडी-जेडीयू के साथ कांग्रेस ने बीजेपी को रोका था, वैसे यूपी में भी रोका जा सकता था। ऐसे में यूपी में कांग्रेस को अब बीएसपी से भी परहेज नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा की तीन-चौथाई सीटों पर कब्जा कर लिया है, वहीं हाल यूपी की लोकसभा सीटों को लेकर भी है। बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए ने यूपी की 80 में से 73 सीटें जीती हैं, जबकि एसपी के पास 5 और कांग्रेस के खाते में सिर्फ 2 सीटें गई हैं।

बीजेपी से संभावित महागठबंधन की बात छुपी नहीं है। यूपी में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी को अगले चुनाव में अपने मौजूदा वोट शेयर 40 प्रतिशत से आगे बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा माहौल के सामान्य होने के बाद बीएसपी और एसपी से महागठबंधन को लेकर अनौपचारिक बात की जाएगी। बीएसपी और एसपी के बीच के मतभेद के कारण यूपी में महागठबंधन नहीं हो सका और इसलिए बिहार की तरह प्रयोग यहां देखने को नहीं मिला।

कांग्रेस महासचिव ने सी पी जोशी ने महागठबंधन की संभावना पर कहा, ‘हम मोदी की राजनीति के चुनौती देने और भंडाफोड़ करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे, लेकिन यह राज्य की राजनीतिक चुनौतियों पर निर्भर करेगा। हर राज्य की चुनौतियां अलग-अलग हैं। हम 2019 में गठबंधन करेंगे, हम मोदी को बड़ी चुनौती देंगे।’

इस बीच, यूपी और उत्तराखंड में करारी शिकस्त और गोवा-मणिपुर में सरकार नहीं बना पाने के बाद कांग्रेस में विरोध के भी सुर बुलंद होने लगे हैं। वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर और सत्यव्रत चतुर्वेदी पार्टी में बदलाव की बात कर रहे हैं

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